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सुप्रीम कोर्ट ने इथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों की आपूर्ति पर उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में 100% इथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों की अनुमति पर सवाल उठाया है। कोर्ट ने पूछा कि यदि ऐसी गाड़ियों को मंजूरी दी जाती है, तो ईंधन की आपूर्ति कैसे की जाएगी। इस संदर्भ में, अटॉर्नी जनरल ने बताया कि इसके लिए मैन्युफैक्चरिंग व्यवस्था में बड़े बदलाव की आवश्यकता होगी। जानें इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर और क्या कहा गया।
 

सुप्रीम कोर्ट का सवाल


नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने यह प्रश्न उठाया है कि यदि सरकार 100% इथेनॉल से चलने वाले वाहनों को अनुमति देती है, तो इसके लिए ईंधन की आपूर्ति कैसे सुनिश्चित की जाएगी। पेट्रोल में इथेनॉल के मिश्रण से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने मीडिया रिपोर्टों का संदर्भ देते हुए यह सवाल किया। वर्तमान में, 20% इथेनॉल मिश्रण पर ही विवाद चल रहा है।


यह ध्यान देने योग्य है कि 26 अक्टूबर को सड़क परिवहन मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में संशोधन की अधिसूचना जारी की थी, जिससे E100 यानी लगभग शुद्ध एथेनॉल पर चलने वाली फ्लेक्स फ्यूल गाड़ियों को मंजूरी मिली। हालांकि, इसके एक दिन बाद, 27 अक्टूबर को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पेट्रोल में 20% से अधिक इथेनॉल मिलाने की केंद्र की कोई तत्काल योजना नहीं है।


गुरुवार को, सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले शामिल थे, ने कहा, 'हमने कुछ समाचार पत्रों में पढ़ा कि 100% इथेनॉल से चलने वाले वाहनों को मंजूरी दी गई है।' बेंच ने आगे पूछा, 'सैद्धांतिक रूप से, हम जानना चाहते हैं कि यदि 100% इथेनॉल वाली गाड़ियों को अनुमति दी गई है, तो इसकी आपूर्ति कैसे की जाएगी?' अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कोर्ट के सवाल का उत्तर देते हुए कहा, 'इसके लिए मैन्युफैक्चरिंग व्यवस्था में बड़े पैमाने पर बदलाव करना होगा।'