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सुभाष चंद्रा को NCLT से बड़ा झटका, कर्ज वसूली पर रोक

सुभाष चंद्रा को NCLT से बड़ा झटका लगा है, जहां एक विशेष पीठ ने उनके कर्ज वसूली मामले में रोक लगा दी है। पहले के आदेश के अनुसार, चंद्रा की निजी संपत्तियों से 6.25 करोड़ रुपये की वसूली होनी थी, जबकि कुल दावों की राशि 22,006 करोड़ रुपये है। चंद्रा ने इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यह राशि उनके द्वारा व्यक्तिगत रूप से लिए गए कर्ज की नहीं है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और आगे की सुनवाई के बारे में।
 

सुभाष चंद्रा का कर्ज वसूली मामला

नई दिल्ली : एस्सेल ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा को एक महत्वपूर्ण झटका लगा है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की पांच सदस्यीय विशेष पीठ ने 25 अगस्त को एक सदस्य द्वारा दिए गए निर्णय पर रोक लगा दी है। पहले के आदेश के अनुसार, कर्जदाताओं को चंद्रा की निजी संपत्तियों से लगभग 6.25 करोड़ रुपये की वसूली होनी थी, जबकि उनके दावों की कुल राशि लगभग 22,006 करोड़ रुपये है। मंगलवार को सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया गया और एस्सेल समूह के चेयरमैन को अपनी संपत्तियों को बेचने या हस्तांतरित करने से रोका गया।

पीठ के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल ने बताया कि तीसरे सदस्य के साथ पीठ के अन्य सदस्यों के बीच सहमति न होने के कारण कोई अंतिम आदेश नहीं दिया जा सकता।

सुभाष चंद्रा का बचाव

इस मामले ने सोशल मीडिया पर काफी चर्चा बटोरी। सुभाष चंद्रा ने कहा कि 22,006 करोड़ रुपये की राशि को गलत तरीके से समझा गया है, क्योंकि यह उस कर्ज की राशि नहीं है जो उन्होंने व्यक्तिगत रूप से लिया था। यह राशि एस्सेल समूह से संबंधित कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज के लिए उनकी व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ी है।

NCLT का आदेश

NCLT ने सभी पक्षों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि गारंटर को अपनी संपत्तियों को हस्तांतरित करने से रोका जाएगा। न्यायमूर्ति ग्रेवाल ने कहा कि पीठ मामले की पूरी जानकारी लेना चाहती है और सभी पक्षों की सुनवाई करेगी, जिसमें असहमत कर्जदाता भी शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि सभी चिंताओं को हमारे सामने रखा जा सकता है। इसके बाद अगली सुनवाई में उठाए गए सवालों पर विचार किया जाएगा। पहले, दो सदस्यीय पीठ ने पुनर्भुगतान योजना पर अलग-अलग निर्णय दिए थे, जिसके बाद मामला तीसरे सदस्य के पास भेजा गया था।

पब्लिक सेक्टर बैंकों की चुनौती

इसके बाद, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने तीसरे सदस्य के आदेश को चुनौती दी। ये बैंक असहमत कर्जदाता हैं। आदेश में चंद्रा की निजी संपत्तियों से 6.25 करोड़ रुपये की वसूली का निर्देश दिया गया था, जबकि कुल दावों की राशि 22,006 करोड़ रुपये है। बैंकों ने इसे अपीलीय न्यायाधिकरण एनसीएलएटी के समक्ष चुनौती दी।