सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल: कांग्रेस का भाजपा पर आरोप
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का प्रभाव
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक भूख हड़ताल की, जिसके परिणामस्वरूप उनका वजन 12 किलो घट गया। उन्होंने पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन को मजबूती प्रदान की, जिससे उन्हें देशभर में समर्थन मिला। लेकिन जैसे ही उन्होंने अपनी भूख हड़ताल समाप्त की, कांग्रेस और विपक्षी दलों ने उन्हें भाजपा का समर्थक साबित करने की कोशिशें शुरू कर दीं। कई लोगों ने यह सवाल उठाया कि वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत जोधपुर की जेल में रखा गया था। उन्हें मुकदमे की योजना के तहत रिहा किया गया और फिर जंतर मंतर पर भूख हड़ताल के लिए बैठाया गया, ताकि कांग्रेस इस मुद्दे का लाभ न उठा सके।
हालांकि, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को भी भाजपा का आदमी बताया गया है, लेकिन इस समय सोनम वांगचुक पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया है। इस बीच, यह जानकारी सामने आई है कि कांग्रेस के कुछ सदस्य उनके संपर्क में थे। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तनखा ने वांगचुक को सरकार से बातचीत के लिए तैयार किया। उल्लेखनीय है कि जब वांगचुक लेह में प्रदर्शन के दौरान जोधपुर की जेल में थे, तब तनखा उनके मामले की पैरवी कर रहे थे। उन्होंने वांगचुक की बिगड़ती सेहत का हवाला देते हुए उन्हें समझाया और सरकार से बातचीत के लिए तैयार किया। इसके बाद तनखा ने सरकार से उनका संपर्क भी स्थापित किया। लेकिन कांग्रेस के लोग विवेक तनखा को भाजपा का आदमी बताने के बजाय वांगचुक पर निशाना साध रहे हैं।