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सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट, वैश्विक बाजारों का असर

सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का दौर जारी है, जिसमें सोने का दाम 1.44 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी का दाम 2.23 लाख के करीब पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी गिरावट देखी जा रही है, जिसका मुख्य कारण वैश्विक अस्थिरता में कमी और डॉलर इंडेक्स की मजबूती है। जानें इस गिरावट के पीछे के कारण और बाजार की वर्तमान स्थिति के बारे में।
 

सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट

मुंबई: सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। सोने का दाम 1.44 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी का दाम 2.23 लाख रुपए के करीब पहुंच गया।


मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) के अनुसार, सोने का 5 अगस्त, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछले बंद भाव 1,44,162 रुपए प्रति 10 ग्राम की तुलना में 1,44,180 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला।


शुरुआती कारोबार में सोने की कीमत में गिरावट आई, और यह सुबह 9:40 बजे 507 रुपए या 0.35 प्रतिशत की कमी के साथ 1,43,655 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।


इस दौरान सोने ने 1,43,454 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,44,180 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ, जो कि इसका ओपनिंग प्राइस भी था।


चांदी में कारोबार अपेक्षाकृत स्थिर रहा। चांदी का 4 सितंबर 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछले बंद भाव 2,23,472 रुपए प्रति किलो की तुलना में 2,23,912 रुपए प्रति किलो पर खुला, लेकिन शुरुआती कारोबार में बिकवाली देखी गई।


खबर लिखे जाने तक चांदी की कीमत 157 रुपए या 0.07 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 2,23,315 रुपए प्रति किलो पर थी।


चांदी ने 2,22,641 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम स्तर और 2,24,248 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर छुआ।


अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। कॉमेक्स पर सोना 0.41 प्रतिशत की कमी के साथ 4,078 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.18 प्रतिशत की गिरावट के साथ 58.52 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था।


विशेषज्ञों का मानना है कि सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का कारण वैश्विक स्तर पर अस्थिरता में कमी, डॉलर इंडेक्स की मजबूती और ब्याज दरों में वृद्धि की आशंका है।


रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान ने फिर से हमले रोकने पर सहमति जताई है, और मंगलवार को दोनों देशों के बीच कतर में बैठक हो सकती है।


डॉलर इंडेक्स लगातार 101 के ऊपर बना हुआ है। फेड ने कई बार बढ़ती महंगाई पर चिंता जताई है, जिससे आने वाले महीनों में ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना बनी हुई है।