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स्वामी विवेकानंद की जयंती: युवा प्रेरणा का प्रतीक

हर साल 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती पर राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है। यह दिन युवाओं को उनके आदर्शों से प्रेरित करने के लिए समर्पित है। स्वामी विवेकानंद ने आत्मविश्वास और सेवा का संदेश दिया, जो आज भी युवाओं को प्रेरित करता है। 1998 में आई फिल्म 'स्वामी विवेकानंद' उनके जीवन पर आधारित है, जिसमें मिथुन चक्रवर्ती ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस फिल्म के माध्यम से स्वामी विवेकानंद के विचारों और उनके योगदान को दर्शाया गया है।
 

राष्ट्रीय युवा दिवस का महत्व

हर वर्ष 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है। यह दिन युवाओं को उनके आदर्शों से प्रेरित करने के लिए समर्पित है। स्वामी विवेकानंद ने वेदांत और योग के सिद्धांतों को पश्चिमी दुनिया में प्रस्तुत किया और युवाओं को आत्मविश्वास, सेवा और निर्भीकता का संदेश दिया। उनकी शिक्षाओं का प्रभाव फिल्म उद्योग पर भी पड़ा, जो 1998 में रिलीज हुई फिल्म 'स्वामी विवेकानंद' में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।


स्वामी विवेकानंद का प्रेरणादायक संदेश

स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को आत्मविश्वास, निर्भीकता और सेवा का महत्व बताया। उनका प्रसिद्ध उद्धरण 'उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए' आज भी लाखों युवाओं को प्रेरित करता है। फिल्म में भी इसी संदेश को दर्शाया गया है।


फिल्म का निर्माण और कलाकार

इस फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती ने रामकृष्ण परमहंस का किरदार निभाया और अपने उत्कृष्ट अभिनय के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता। फिल्म में कई अन्य बड़े सितारे भी शामिल थे, जिन्होंने इस महान संत के जीवन को जीवंत किया।


फिल्म का निर्देशन और रिलीज

1998 में आई इस हिंदी फिल्म का निर्देशन जी.वी. अय्यर ने किया और इसका निर्माण टी. सुब्बारामी रेड्डी ने किया। फिल्म को सही तरीके से बनाने के लिए पूरी टीम ने कड़ी मेहनत की, जिसमें निर्देशक को पटकथा और शोध में 11 साल लगे। फिल्म 1994 में पूरी हो गई थी, लेकिन इसे 12 जून 1998 को रिलीज किया गया। 15 अगस्त 1998 को इसका प्रीमियर दूरदर्शन पर हुआ।


फिल्म की कहानी और प्रभाव

फिल्म में सर्वदमन डी. बनर्जी ने स्वामी विवेकानंद का किरदार निभाया, जबकि मिथुन चक्रवर्ती ने उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस की भूमिका में शानदार काम किया। मिथुन के प्रदर्शन की सराहना हुई और उन्हें तीसरा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। फिल्म में प्रदीप कुमार उनके पिता और तनुजा उनकी मां के किरदार में थे। इसके अलावा, देबाश्री रॉय, मीनाक्षी शेषाद्री, ममूटी, शम्मी कपूर, शशि कपूर, अनुपम खेर, हेमा मालिनी, राखी और जया प्रदा जैसे कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं।


स्वामी विवेकानंद का जीवन और योगदान

फिल्म स्वामी विवेकानंद उनके जन्म से लेकर 1897 में पश्चिम से भारत लौटने तक के जीवन को दर्शाती है, जिसमें उनके आंतरिक संघर्ष, गुरु भक्ति और शिकागो भाषण जैसे महत्वपूर्ण प्रसंग शामिल हैं। फिल्म को समीक्षकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली, लेकिन मिथुन के अभिनय को फिल्म की सबसे बड़ी ताकत माना गया। यह फिल्म युवाओं को स्वामी विवेकानंद के आदर्शों से जोड़ने का एक बेहतरीन माध्यम है।


स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय

स्वामी विवेकानंद (नरेंद्रनाथ दत्ता) का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ। वह भारत के महान आध्यात्मिक गुरु, दार्शनिक और युवा प्रेरक थे। वे रामकृष्ण परमहंस के प्रमुख शिष्य थे और वेदांत दर्शन तथा योग को पश्चिमी दुनिया में पहुंचाने वाले प्रमुख व्यक्ति माने जाते हैं। उनकी सबसे प्रसिद्ध उपलब्धि 1893 में शिकागो में विश्व धर्म संसद में दिया गया ऐतिहासिक भाषण है, जिसने उन्हें विश्व स्तर पर पहचान दिलाई। उन्होंने रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन की स्थापना की, जो शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सेवा में सक्रिय हैं।