हरियाणा का नया बजट: ग्रामीण विकास और सौर ऊर्जा पर जोर
मुख्यमंत्री का बजट पेश
चंडीगढ़ . मुख्यमंत्री नायब सैनी ने वित्त मंत्री के रूप में अपनी सरकार का बजट प्रस्तुत किया है, जो 2 लाख 23 हजार करोड़ रुपये से अधिक है। यह बजट पिछले वर्ष की तुलना में 10.28% अधिक है और इसमें ग्रामीण अर्थव्यवस्था तथा पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया है। खासकर रोहतक, हिसार, जींद और भिवानी जैसे जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 'अभिनव पायलट परियोजना' की घोषणा की गई है। इस योजना के तहत गांवों की खाली पंचायती भूमि पर सौर ऊर्जा फार्म स्थापित किए जाएंगे, जिससे उत्पन्न बिजली सीधे गांव के निवासियों को रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जाएगी।
बिजली बिलों में कमी और पंचायतों की आय में वृद्धि
बिजली बिलों से मिलेगी मुक्ति और बढ़ेगी पंचायतों की आय
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने विधानसभा में बताया कि सौर फार्म परियोजना से ग्रामीणों को दो लाभ होंगे। एक तरफ, उनके मासिक बिजली बिलों में कमी आएगी, दूसरी तरफ पंचायतों के लिए एक स्थायी आय का स्रोत बनेगा। सरकार ने ढाणियों में रहने वाले परिवारों का भी ध्यान रखा है। दूरदराज की ढाणियों के लिए 1 से 3 किलोवाट क्षमता वाले बैटरी युक्त सौर पावर प्लांट स्थापित किए जाएंगे, जिससे 24 घंटे बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
सौर पैनल का लक्ष्य बढ़ाया गया
सोलर पैनल का लक्ष्य चार गुना बढ़ा
हरियाणा सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत अपनी गति तेज कर दी है। वर्तमान में प्रदेश के 54,674 घरों में सौर पैनल लगे हैं, जिसे 2026-27 तक बढ़ाकर 2.2 लाख घरों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि ग्रीन हाइड्रोजन नीति के तहत पानीपत में राज्य का पहला प्लांट स्थापित किया जाएगा। 2030 तक हरियाणा 250 किलो टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के साथ देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होने की योजना बना रहा है।
स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहन
स्वयं सहायता समूहों और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन
पर्यावरण और ग्रामीण रोजगार को जोड़ते हुए, मुख्यमंत्री ने शामलात भूमि के प्रबंधन में बदलाव किया है। अब 500 वर्ग गज तक की भूमि स्वयं सहायता समूहों (SHG) को केवल 10 रुपये प्रति वर्ग गज की वार्षिक लीज पर डेयरी के लिए दी जाएगी। इनके उत्पादों को उचित बाजार उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक ब्लॉक में 'आधुनिक ग्राम हाट' बनाए जाएंगे। बजट में पंचायतों की भूमि का एक हिस्सा प्राकृतिक खेती के लिए आरक्षित करने का प्रावधान भी किया गया है, जो रसायनों के उपयोग में कमी लाने में सहायक होगा।