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हरियाणा की दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना में बदलाव: शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता

हरियाणा सरकार ने दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिससे महिलाओं को आर्थिक सहायता के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर ध्यान देने का अवसर मिलेगा। इस योजना के तहत आय सीमा बढ़ाई गई है और नई शर्तें जोड़ी गई हैं, जिससे माता-पिता बच्चों की पढ़ाई को लेकर अधिक जागरूक होंगे। मासिक सहायता राशि में भी बदलाव किया गया है, जिससे महिलाओं को बचत की आदत विकसित करने में मदद मिलेगी। जानें इस योजना के नए नियम और लाभ।
 

महिलाओं के लिए नई दिशा

हरियाणा सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना को नए सिरे से परिभाषित किया है। अब यह योजना केवल मासिक सहायता तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और समग्र विकास से भी जुड़ गई है। यह निर्णय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया।


आय सीमा में वृद्धि और नई शर्तें

इस योजना का लाभ अब उन महिलाओं को भी मिलेगा जिनके परिवार की सालाना आय 1 लाख 20 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख 80 हजार रुपये कर दी गई है।


सरकार का उद्देश्य है कि आर्थिक सहायता के साथ-साथ परिवारों में शिक्षा और पोषण को भी प्राथमिकता मिले।


नई व्यवस्था की विशेषताएँ

1.20 लाख रुपये तक आय वाले परिवार पहले की तरह योजना में रहेंगे।


1.20 से 1.80 लाख रुपये आय वाले परिवारों के लिए नई शर्तें लागू होंगी, जिसमें महिला को तभी लाभ मिलेगा जब बच्चे दसवीं या बारहवीं में 80 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल करेंगे।


सरकार का मानना है कि इससे माता-पिता बच्चों की पढ़ाई को लेकर अधिक जागरूक होंगे।


मासिक सहायता राशि में बदलाव

योजना में एक और बड़ा बदलाव मासिक सहायता राशि को लेकर किया गया है। पहले महिलाओं के खाते में हर महीने सीधे 2100 रुपये ट्रांसफर होते थे।


अब 1100 रुपये नकद सीधे बैंक खाते में आएंगे, जबकि 1000 रुपये सरकार द्वारा जमा योजना में सुरक्षित रहेंगे। इस जमा राशि पर ब्याज भी मिलेगा।


तिमाही भुगतान प्रणाली

सरकार ने यह भी तय किया है कि अब सहायता राशि हर महीने नहीं, बल्कि तिमाही आधार पर दी जाएगी।


पहले तीन महीने में कुल 6300 रुपये नकद मिलते थे, जबकि अब तिमाही में 3300 रुपये नकद मिलेंगे।


बच्चों की सेहत और शिक्षा का महत्व

नई व्यवस्था में बच्चों की सेहत और पोषण को भी योजना से जोड़ा गया है।


बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ना होगा और उन्हें तय शैक्षणिक स्तर हासिल करना होगा।


पारदर्शिता के लिए ग्राम सभाओं में सूची

सरकार ने लाभार्थियों की सूची ग्राम सभाओं में सार्वजनिक रूप से चस्पा करने का निर्णय लिया है।


यदि किसी महिला की पात्रता पर आपत्ति होती है और जांच में वह सही पाई जाती है, तो उसका नाम सूची से हटा दिया जाएगा।


महिलाओं की भागीदारी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 10.25 लाख से ज्यादा आवेदन आए हैं और करीब 8 लाख महिलाएं नियमित रूप से योजना का लाभ ले रही हैं।


सरकार ने दो किस्तों में 250 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की है।


महत्वपूर्ण बदलाव

यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि महिलाओं की आर्थिक मदद को बच्चों के भविष्य से जोड़ा गया है।


शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों को समान महत्व दिया गया है, जिससे राज्य की सामाजिक योजनाओं में परिणाम आधारित मॉडल की शुरुआत हुई है।