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हरियाणा में दो आईएएस अधिकारियों का निलंबन: बैंक घोटाले की जांच में बड़ा कदम

हरियाणा में 590 करोड़ रुपये के आईडीएफसी बैंक घोटाले के सिलसिले में दो आईएएस अधिकारियों, राम कुमार सिंह और प्रदीप कुमार, को निलंबित कर दिया गया है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा जारी आदेश में निलंबन के कारणों का उल्लेख नहीं किया गया है। सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की है और जल्द ही जांच के लिए टीम भेजने की योजना बना रही है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और इसके संभावित प्रभाव।
 

मुख्य सचिव का आदेश, निलंबन के कारणों का खुलासा नहीं


हरियाणा में एक निजी बैंक के 590 करोड़ रुपये के घोटाले में सरकार ने उठाया बड़ा कदम।
हरियाणा सरकार ने सीबीआई को इस मामले की जांच सौंप दी है। इस बीच, आईएएस अधिकारी राम कुमार सिंह और प्रदीप कुमार को निलंबित कर दिया गया है।


हालांकि, मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा जारी आदेश में निलंबन के कारणों का उल्लेख नहीं किया गया है। यह निर्णय हाल ही में सामने आए आईडीएफसी बैंक घोटाले से संबंधित माना जा रहा है।


निलंबित अधिकारियों की जानकारी

निलंबित अधिकारियों में 2011 बैच के प्रदीप कुमार-I और 2012 बैच के राम कुमार सिंह शामिल हैं। प्रदीप कुमार राज्य परिवहन विभाग के निदेशक और विशेष सचिव के पद पर कार्यरत थे, जबकि राम कुमार सिंह विशेष सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग और अतिरिक्त CEO, पंचकूला मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी के पद पर थे।


प्रदीप कुमार 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं, जबकि राम कुमार सिंह की रिटायरमेंट 30 नवंबर 2027 में होगी।


सबसिस्टेंस अलाउंस की व्यवस्था

मुख्य सचिव कार्यालय द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, दोनों अधिकारियों को ऑल इंडिया सर्विसेज (डिसिप्लिन एंड अपील) रूल्स, 1969 के तहत निलंबित किया गया है। निलंबन के दौरान, उनका मुख्यालय मुख्य सचिव कार्यालय की सर्विसेज-I शाखा चंडीगढ़ रहेगा। उन्हें नियमों के अनुसार सबसिस्टेंस अलाउंस भी दिया जाएगा।


सीबीआई द्वारा एफआईआर दर्ज

हरियाणा के 590 करोड़ रुपये के आईडीएफसी बैंक घोटाले में सीबीआई ने नई दिल्ली में एफआईआर दर्ज की है। सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा ने यह मामला दर्ज किया है।


सूत्रों के अनुसार, सीबीआई की एक टीम जल्द ही चंडीगढ़ और पंचकूला में जांच के लिए पहुंचेगी। एसीबी से दस्तावेज प्राप्त करने के बाद, कई स्थानों पर छापेमारी की संभावना है।


इस मामले की वर्तमान में जांच हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा की जा रही है। एसीबी ने 6 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए हरियाणा सरकार से मंजूरी मांगी थी, जिसमें 5 आईएएस अधिकारी भी शामिल हैं। सीबीआई द्वारा एफआईआर दर्ज करने से यह मामला प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर महत्वपूर्ण मोड़ ले सकता है।