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हरियाणा में मानसून की वापसी: मौसम में बदलाव और किसानों के लिए सलाह

हरियाणा में मानसून की वापसी के साथ मौसम में बदलाव आ रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, 20 सितंबर से पूरे राज्य में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। इस वर्ष मानसून के आंकड़े निराशाजनक रहे हैं, जिससे किसानों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। मौसम विभाग ने कीटों के प्रकोप की चेतावनी दी है और किसानों को फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानियाँ बरतने की सलाह दी है। जानें इस मौसम में क्या करें और क्या न करें।
 

हरियाणा में मानसून की वापसी

हरियाणा मौसम अपडेट: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के लिए पश्चिमी राजस्थान के रास्ते सभी परिस्थितियां अनुकूल हो गई हैं। इसका प्रभाव हरियाणा के मैदानी क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है, और 20 सितंबर से पूरे राज्य में मौसम शुष्क रहने की संभावना है।


मौसम में बदलाव

मानसून ट्रफ रेखा के कमजोर होने के साथ ही हिसार, भिवानी, सिरसा और राजस्थान से सटे क्षेत्रों में सुबह हल्की धुंध छा गई है। बारिश रुकने के बाद धूप खिलने से राज्य के औसत अधिकतम तापमान में लगभग 0.8 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है। शुक्रवार को एनसीआर के फरीदाबाद और मेवात के नूंह में दिन का तापमान 35.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।


2026 का मानसून क्यों रहा सूखा?

हरियाणा में इस बार मानसून के आंकड़े निराशाजनक रहे हैं। जून से मध्य सितंबर तक राज्य में सामान्य 408 मिमी के मुकाबले केवल 317 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 22 प्रतिशत कम है। सितंबर में भी केवल 34.1 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य 58.3 मिमी से 42 प्रतिशत कम है।


पिछले 25 वर्षों में यह नौवां अवसर है जब हरियाणा में मानसूनी बारिश 300 मिमी के आसपास रही है। इससे पहले 2014 में राज्य ने सबसे भयंकर सूखा झेला था, जब केवल 200.1 मिमी बारिश हुई थी। इस सीजन में 22 जिलों में से 12 में सामान्य स्तर पर बारिश हुई, जबकि 9 जिलों में सूखा जैसी स्थिति बनी रही।


मौसम विभाग की चेतावनी

मानसून की विदाई के समय हवा में 50 से 90 प्रतिशत तक नमी बनी हुई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दिन में तेज धूप और हवा में अधिक नमी कीटों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती है। इससे कपास की फसल में सफेद मक्खी और गुलाबी सुंडी का प्रकोप बढ़ सकता है।


जीटी रोड बेल्ट के कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल और अंबाला जैसे प्रमुख धान उत्पादक जिलों में तना छेदक कीट का खतरा बढ़ गया है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि अगले दो से तीन दिन तक खेतों में गैर-जरूरी रासायनिक छिड़काव और सिंचाई से बचें। जब आसमान साफ हो जाए, तभी अनुशंसित कीटनाशकों का उपयोग करें।


किसानों के लिए सावधानियां

तापमान और उमस के उतार-चढ़ाव को देखते हुए सब्जी उत्पादक किसानों को सलाह दी गई है कि वे तुड़ाई केवल सुबह या साफ मौसम में करें। गीले खेत में सब्जियों को तोड़ने से फंगल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ सकता है।


पशुपालकों को सलाह दी गई है कि दुधारू पशुओं को खुले और हवादार शेड में रखें। उमस भरे मौसम में दूध उत्पादन क्षमता प्रभावित न हो, इसके लिए रोजाना चारे के साथ 50 से 100 ग्राम मिनरल मिक्सचर दें। #HaryanaWeather #Monsoon2026 #FarmersAlert