हरियाणा में लाए जाएंगे 11वीं सदी की मां सरस्वती की प्रतिमा
मां सरस्वती की प्रतिमा का हरियाणा में प्रतिष्ठान
मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मंदिर की प्रतिमा अब हरियाणा में स्थापित सरस्वती संग्रहालय में प्रतिष्ठित किया जाएगा
चंडीगढ़ : हरियाणा सरस्वती हेरिटेज विकास बोर्ड ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मां सरस्वती की सदियों पुरानी प्रतिमा को लंदन से वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह प्रतिमा वर्तमान में लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी गई है, जिसे 19वीं सदी में मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला मंदिर से अंग्रेजों द्वारा चुराया गया था। अब हरियाणा सरकार और सरस्वती हेरिटेज विकास बोर्ड के प्रयासों से इसे हरियाणा के सरस्वती संग्रहालय में स्थापित किया जाएगा।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
बोर्ड के उपाध्यक्ष धूमन सिंह किरमच ने बताया कि यह प्रतिमा धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। हाल ही में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भोजशाला परिसर को प्राचीन सरस्वती वाग्देवी मंदिर मानते हुए हिंदू समाज को पूजा का अधिकार दिया है। इस निर्णय के बाद, प्रतिमा को वापस लाने की मांग और भी प्रासंगिक हो गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार विदेशों से प्राचीन धरोहरों को वापस लाने का अभियान चला रही है।
हरियाणा सरस्वती संग्रहालय में प्रतिष्ठान
हरियाणा सरस्वती बोर्ड ने इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार से संपर्क किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को भी इस विषय में पत्राचार के माध्यम से जानकारी दी गई है। बोर्ड का उद्देश्य इस प्रतिमा को भारत लाकर सरस्वती सभ्यता से जुड़े क्षेत्रों में प्रदर्शित करना है। अंततः इसे हरियाणा में स्थापित सरस्वती संग्रहालय में प्रतिष्ठित किया जाएगा।
प्रतिमा का ऐतिहासिक महत्व
ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, यह प्रतिमा परमार राजवंश के ग्यारहवीं सदी के काल की है। इसे धार क्षेत्र में पुरातात्विक खुदाई के दौरान ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा प्राप्त किया गया था। उस समय दो प्रतिमाएं मिली थीं, जिनमें से एक वर्तमान में भोजशाला में स्थापित है। दूसरी प्रतिमा ब्रिटिश म्यूजियम में रखी गई है। यह प्रतिमा संगमरमर से बनी है और इसमें संस्कृत तथा देवनागरी में शिलालेख अंकित हैं। यदि यह प्रतिमा भारत वापस लाई जाती है, तो इन शिलालेखों पर गहन शोध किया जाएगा। इससे प्राचीन सभ्यता, सरस्वती नदी और उससे जुड़ी सांस्कृतिक विरासत के बारे में नई जानकारी मिलेगी।