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हरियाणा में स्कूलों की सुरक्षा को लेकर आयोग की सख्त कार्रवाई

हरियाणा के सोनीपत में एक बच्चे की मौत के बाद मानवाधिकार आयोग ने सभी सरकारी स्कूलों के लिए सुरक्षा ऑडिट का आदेश दिया है। आयोग ने जर्जर भवनों की पहचान और सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इस मामले में अगली सुनवाई 8 दिसंबर 2026 को होगी। जानें इस महत्वपूर्ण खबर के बारे में और अधिक जानकारी।
 

हरियाणा में मानवाधिकार आयोग की कार्रवाई

हरियाणा के सोनीपत जिले के गन्नौर में गढ़ी बलिंदा स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार का मेहराब गिरने से एक 11 वर्षीय बच्चे की मृत्यु के मामले में हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है। आयोग ने सभी सरकारी स्कूलों में संरचनात्मक सुरक्षा ऑडिट कराने का आदेश दिया है और जर्जर भवनों की पहचान कर समय पर सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।


सुरक्षा ऑडिट का आदेश

आयोग की पूर्ण पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति ललित बत्रा, कुलदीप जैन और दीप भाटिया शामिल हैं, ने कहा कि इस घटना से जुड़ी चिंताओं को केवल गढ़ी बलिंदा के स्कूल तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने माध्यमिक शिक्षा विभाग के महानिदेशक, प्रारंभिक शिक्षा निदेशक और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (एचएसएसपीपी) के राज्य परियोजना निदेशक को सभी सरकारी स्कूलों की संरचनात्मक सुरक्षा की व्यापक समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।


भवनों की जांच का निर्देश

आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी राजकीय प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों का नियमित निरीक्षण किया जाए। इसके लिए योग्य सिविल इंजीनियरों या सक्षम तकनीकी एजेंसियों के माध्यम से भवनों का संरचनात्मक सुरक्षा ऑडिट कराया जाएगा।


हादसे से पहले का निरीक्षण

गढ़ी बलिंदा मामले की सुनवाई के दौरान सहायक पुलिस आयुक्त, गन्नौर ने आयोग को बताया कि मामले की पुलिस जांच जारी है। खंड शिक्षा अधिकारी, गन्नौर की रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल परिसर का निरीक्षण 19 मई 2026 को किया गया था। कनिष्ठ अभियंता ने 22 मई को तकनीकी निरीक्षण किया और इसके बाद 1 जून को 5.68 लाख रुपये की मरम्मत का अनुमान तैयार किया गया था। हादसे के बाद स्कूल की मरम्मत और नवीनीकरण के लिए 26.05 लाख रुपये का नया अनुमान तैयार कर जिला प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी, सोनीपत को भेजा गया।


समेकित रिपोर्ट की मांग

आयोग के सहायक रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा विभाग के महानिदेशक, प्रारंभिक शिक्षा निदेशक और एचएसएसपीपी के राज्य परियोजना निदेशक को सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर समेकित रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इस रिपोर्ट में प्रदेश में जर्जर, असुरक्षित या खतरनाक पाए गए स्कूल भवनों की संख्या और उनके संबंध में की गई या प्रस्तावित सुधारात्मक कार्रवाई का विवरण होगा। मामले की अगली सुनवाई 8 दिसंबर 2026 को होगी।