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हांसी में किसानों का प्रदर्शन: पुलिस और किसानों के बीच टकराव

हरियाणा के हांसी में किसानों का प्रदर्शन पुलिस के साथ टकराव में बदल गया, जिसमें कई किसान और पुलिसकर्मी घायल हुए। किसान जीवन कुंडू की हत्या के मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। इस दौरान विधायक देवेंद्र अत्री ने भी बयान दिया कि यदि उनका कोई करीबी आरोपी होता, तो वह उसका साथ नहीं देते। जानें इस घटना के सभी पहलुओं के बारे में।
 

किसानों और पुलिस के बीच संघर्ष


हरियाणा के हांसी में आज सुबह किसानों और पुलिस के बीच एक गंभीर टकराव हुआ। किसानों को खदेड़ने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप कई किसान घायल हुए। इस संघर्ष में कुछ पुलिसकर्मी भी चोटिल हुए। यह घटना उस समय हुई जब किसानों ने 4 अगस्त को डेयरी संचालक जीवन कुंडू की हत्या के मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।


मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में बाधा डालने का प्रयास

किसान मुख्यमंत्री नायब सैनी के ध्वजारोहण कार्यक्रम को रोकने का प्रयास कर रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए लाठीचार्ज किया, जिसके बाद किसानों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इस दौरान हांसी के एसपी विनोद कुमार और एक डीएसपी घायल हो गए।


किसान नेता सुरेश कौथ की गिरफ्तारी

पुलिस ने किसान नेता सुरेश कौथ सहित कई अन्य लोगों को हिरासत में लिया है। एसपी विनोद कुमार ने बताया कि सुरेश कौथ समेत 13 नामजद लोगों के खिलाफ हांसी थाने में मामला दर्ज किया गया है। इस हमले में 5 से 6 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।


टोल प्लाजा पर किसानों का विरोध

किसानों और खाप प्रतिनिधियों ने मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी में देरी के विरोध में पिछले दिन क्षेत्र के 7 प्रमुख टोल प्लाजा को 3 घंटे के लिए बंद रखा। इस दौरान कई स्थानों पर वाहन चालकों और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस हुई।


विधायक देवेंद्र अत्री का बयान

जींद के उचाना कलां से बीजेपी विधायक देवेंद्र चतुर्भुज अत्री ने जीवन कुंडू हत्याकांड पर कहा कि यदि उनका अपना भाई या बेटा भी आरोपी होता, तो वह उसका साथ नहीं देते। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में वह पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं।


दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग

अत्री ने कहा कि मामले में कानून को अपना काम करना चाहिए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि संवेदनशील मामलों को राजनीतिक रंग देने के बजाय पीड़ित परिवार के साथ खड़े होना चाहिए।