हिमाचल प्रदेश में मिड-डे मील वर्कर्स की हड़ताल, वेतन और सुविधाओं की मांग
हड़ताल का कारण और मांगें
शिमला। 22 जून, सोमवार को हिमाचल प्रदेश में मिड-डे मील वर्कर्स ने हड़ताल का आह्वान किया है। इन वर्कर्स ने केंद्र और राज्य सरकार पर शोषण का आरोप लगाते हुए, सीटू से संबंधित यूनियन के माध्यम से वेतन वृद्धि, 12 महीने का वेतन, और ग्रेच्युटी-पेंशन जैसी मांगों के लिए सचिवालय तक आक्रोश रैली निकाली। इस दिन स्कूलों में दोपहर का भोजन भी नहीं पकाया गया, जिसके चलते अध्यापकों ने बच्चों के लिए भोजन का प्रबंध करने की कोशिश की।
वेतन और छुट्टियों की कमी
तीन-तीन महीने का वेतन नहीं मिलता
यूनियन का कहना है कि पिछले 17 वर्षों में केंद्र सरकार ने उनके वेतन में कोई वृद्धि नहीं की है और राज्य सरकार भी इस मामले में उदासीन है। उन्हें सालभर में एक भी छुट्टी नहीं मिलती और कई बार तीन महीने तक वेतन नहीं मिलता।
अन्य समस्याएं
मेडिकल चेकअप का खर्च भी नहीं मिल रहा
यूनियन ने यह भी बताया कि 25 बच्चों की शर्त के कारण नौकरी से निकाल दिया जाता है। रिटायरमेंट पर ग्रेच्युटी-पेंशन का भी कोई प्रावधान नहीं है। इसके अलावा, साल में तीन बार मेडिकल चेकअप का खर्च खुद उठाना पड़ता है।
वर्कर्स की प्रमुख मांगें
12 महीने वेतन और छुट्टियां मिलें
मिड-डे मील वर्कर्स की मांग है कि उन्हें हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार 7000 रुपये मासिक वेतन दिया जाए, आंगनबाड़ी की तरह छुट्टियां मिलनी चाहिए, 25 बच्चों की शर्त को हटाया जाए, ग्रेच्युटी-पेंशन का प्रावधान किया जाए, और मेडिकल खर्च विभाग द्वारा उठाया जाए। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो आंदोलन को और भी तेज किया जाएगा।