2025 में श्रम कानूनों में महत्वपूर्ण बदलाव: नई श्रम संहिताएं और नियम
नई दिल्ली में श्रम कानूनों का बदलाव
नई दिल्ली: वर्ष 2025 ने कर्मचारियों और श्रमिकों के लिए कई महत्वपूर्ण परिवर्तन लाए हैं। इस वर्ष का सबसे बड़ा परिवर्तन श्रम कोड में हुआ है, जिसमें पहले के 28 अलग-अलग कानूनों को समाप्त कर चार नई श्रम संहिताएं लागू की गई हैं। ये चार श्रम संहिताएं हैं: मजदूरी संहिता (2019), औद्योगिक संबंध संहिता (2020), सामाजिक सुरक्षा संहिता (2020), और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियों संहिता (2020)।
21 नवंबर 2025 से लागू होने वाले कानून
इन नए कानूनों का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों के लिए वेतन, पेंशन, पीएफ, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। ये सभी कानून 21 नवंबर 2025 से प्रभावी होंगे, और उम्मीद की जा रही है कि नए साल में इन्हें पूरी तरह से लागू किया जाएगा।
श्रम मंत्रालय का महत्वपूर्ण कदम
साल के अंत में, 31 दिसंबर 2025 को श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने इन चार श्रम संहिताओं के तहत ड्राफ्ट नियमों को पूर्व-प्रकाशित किया। मंत्रालय ने कहा कि ड्राफ्ट अधिसूचनाओं के सार्वजनिक होने के 30 से 45 दिनों के भीतर सभी संबंधित पक्षों से सुझाव, आपत्तियां और टिप्पणियां मांगी गई हैं। परामर्श प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम नियमों को अधिसूचित किया जाएगा।
वेतन की गणना के लिए दिशा-निर्देश
वेतन संहिता (सेंट्रल) नियम, 2025 के ड्राफ्ट में न्यूनतम मजदूरी तय करने और उसकी गणना के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश शामिल हैं। न्यूनतम मजदूरी पहले दैनिक आधार पर निर्धारित की जाएगी और फिर इसे प्रति घंटा और मासिक वेतन में परिवर्तित किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मजदूरी एक सामान्य कामकाजी परिवार की आवश्यकताओं को पूरा कर सके। इसमें भोजन, कपड़े, आवास, बिजली, ईंधन, शिक्षा, चिकित्सा खर्च और अन्य बुनियादी जरूरतें शामिल हैं। केंद्र सरकार द्वारा एक राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी तय की जाएगी, और किसी भी राज्य को इसके नीचे मजदूरी निर्धारित करने की अनुमति नहीं होगी।
रात की शिफ्ट के लिए विशेष प्रावधान
ड्राफ्ट नियमों में सप्ताह में अधिकतम 48 कार्य घंटे निर्धारित किए गए हैं, जबकि वेतन की गणना 8 घंटे के कार्य दिवस के आधार पर की जाएगी। इसके अलावा, रात की शिफ्ट में काम करने के लिए विशेष प्रावधान भी हैं। यह नियम मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस, लॉजिस्टिक्स और आईटी सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण हैं, जहां 24 घंटे काम होता है। महिला कर्मचारियों को सहमति और सुरक्षित माहौल के साथ रात की शिफ्ट में काम करने की अनुमति दी गई है।
सैलरी का समय पर भुगतान
नए नियमों के अनुसार, कर्मचारियों को सैलरी समय पर मिलनी चाहिए। किसी भी वेतन अवधि में कुल कटौतियां कर्मचारी के वेतन का 50% या उससे कम हो सकती हैं। बेसिक पे, DA और अन्य भत्ते कुल सैलरी का अधिकतम 50% होंगे, जबकि बाकी में HRA, बोनस, कमीशन, PF, ओवरटाइम और अन्य अलाउंस शामिल होंगे। यदि कोई भत्ता तय सीमा से अधिक है, तो अतिरिक्त राशि अपने आप सैलरी में जुड़ जाएगी। इसके अलावा, कर्मचारी के वेतन में कटौती से पहले नियोक्ता को उचित प्रक्रिया अपनानी होगी, जिसमें कर्मचारी को सूचना देना और अपनी बात रखने का मौका देना शामिल है।
शिकायत और पारदर्शिता
ड्राफ्ट नियमों में यह भी प्रावधान है कि कर्मचारी कम वेतन, लेट सैलरी, बिना भुगतान के ओवरटाइम या बोनस से इंकार करने के मामले में शिकायत दर्ज कर सकते हैं। अधिकारी उनके खिलाफ आदेश जारी कर सकते हैं और कर्मचारी इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं। इन सभी बदलावों से कर्मचारियों की सुरक्षा, अधिकार और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
ये नए नियम न केवल औपचारिक कर्मचारियों के लिए, बल्कि अनौपचारिक श्रमिकों, कॉन्ट्रैक्ट और फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों के लिए भी लाभकारी साबित होंगे। यह बदलाव कामकाजी वर्ग की स्थिति को मजबूत करने और उनकी सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।