AAP में दलबदल: सात सांसदों ने इस्तीफा दिया, कानूनी पेचीदगियां बढ़ीं
नई दिल्ली में राजनीतिक हलचल
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने जानकारी दी है कि पार्टी के सात सांसदों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और वे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो गए हैं। हालांकि, बीजेपी कार्यालय में मिठाई बांटते हुए केवल तीन नेता- राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक- ही नजर आए। इस घटनाक्रम ने एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या ये सांसद दलबदल कानून के तहत अयोग्य ठहराए जाएंगे?
दलबदल कानून का संदर्भ
भारत के संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार, यदि कोई सांसद अपनी पार्टी से इस्तीफा देता है, तो उसे अयोग्य माना जाता है। लेकिन इसमें एक अपवाद है, जो खंड 4 के तहत आता है। यदि किसी दल के दो-तिहाई सदस्य किसी अन्य पार्टी में विलय करना चाहते हैं, तो वे अयोग्य नहीं होंगे। राघव चड्ढा इसी अपवाद का हवाला दे रहे हैं, जबकि AAP का कहना है कि यहां कोई विलय नहीं हो रहा है, बल्कि व्यक्तिगत रूप से पार्टी छोड़ी जा रही है।
AAP का रुख
AAP ने कहा- 'यह विलय नहीं, दलबदल है'
आम आदमी पार्टी ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। AAP के राज्यसभा व्हिप एनडी गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि वे तीनों सांसदों (चड्ढा, मित्तल, पाठक) के खिलाफ अयोग्यता की याचिका दायर करेंगे। AAP का तर्क है कि जब तक मूल पार्टी का विलय नहीं होता, केवल विधायी दल के दो-तिहाई सदस्य मिलकर विलय का दावा नहीं कर सकते। संजय सिंह ने इसे स्वेच्छा से पार्टी छोड़ना बताते हुए उन्हें अयोग्य ठहराए जाने की मांग की है.
कानूनी विशेषज्ञों की राय
कानूनी जानकार क्या कहते हैं?
इस मामले पर कानूनविदों के बीच मतभेद हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल का कहना है कि 'सदन' के दो-तिहाई सदस्यों की सहमति से विलय मान्य है, जिससे अयोग्यता का खतरा नहीं है। वहीं, संजय हेगड़े और निज़ाम पाशा इससे असहमत हैं। उनका कहना है कि मूल राजनीतिक पार्टी (AAP) की सहमति के बिना यह विलय वैध नहीं है। यह मामला फिलहाल कानूनी पेचीदगियों में उलझा हुआ है और अंतिम निर्णय राज्यसभा के सभापति को लेना है.
अन्य सांसदों की स्थिति
बाकी सांसदों ने क्या किया? स्वाति मालीवाल का अलग रास्ता
राघव चड्ढा ने हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल के नाम भी शामिल किए थे। हालांकि, स्वाति मालीवाल ने पार्टी छोड़ने की घोषणा की है, लेकिन सीधे बीजेपी में शामिल होने की पुष्टि नहीं की है। उन्होंने AAP में बढ़ते भ्रष्टाचार और महिलाओं के उत्पीड़न का हवाला दिया। बाकी तीन सांसदों ने अब तक कोई बयान जारी नहीं किया है, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वे वास्तव में चड्ढा के साथ हैं या नहीं.
राजनीतिक प्रभाव
राजनीतिक दृष्टि से यह घटनाक्रम पहले से मुश्किल में चल रही AAP के लिए बड़ा झटका है। दिल्ली और पंजाब में पार्टी पहले से ही कई मोर्चों पर संघर्ष कर रही है। ऐसे में वरिष्ठ राज्यसभा सांसदों का इस तरह पाला बदलना पार्टी की मुश्किलें बढ़ा सकता है। अब सबकी निगाहें राज्यसभा के सभापति के फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि ये नेता अपनी सीटें बचा पाते हैं या फिर उन्हें अयोग्य ठहरा दिया जाता है.