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BJP ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए 111 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की

भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए अपनी दूसरी उम्मीदवारों की सूची जारी की है, जिसमें 111 नाम शामिल हैं। इस सूची में अनुभवी और नए चेहरों का संतुलन देखने को मिलता है। प्रमुख नेताओं की उपस्थिति में हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण सीटों पर उम्मीदवारों का चयन किया गया है। जानें इस सूची में कौन-कौन से नाम शामिल हैं और पार्टी की रणनीति क्या है।
 

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए BJP की नई सूची

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए अपनी दूसरी उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। इस सूची में कुल 111 नाम शामिल हैं, जो दर्शाता है कि पार्टी चुनावी मैदान में पूरी तैयारी के साथ उतरने के लिए तैयार है। इस लिस्ट में अनुभवी और नए चेहरों का संतुलन बनाने का प्रयास किया गया है। राज्यसभा सांसद रूपा गांगुली को भी इस बार मौका दिया गया है, जबकि केंद्रीय मंत्री निशीथ प्रमाणिक को मथाभांगा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। इसके साथ ही सुवेंदु अधिकारी के परिवार से भी एक नाम शामिल किया गया है, जिससे संगठन और स्थानीय समीकरणों को साधने की कोशिश की गई है।



पार्टी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह सूची केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में मंजूर की गई, जिसकी अध्यक्षता नितिन नवीन ने की। इस बैठक में नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह और अमित शाह जैसे कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। उम्मीदवारों की बात करें तो पार्टी ने मेक्लिगंज से दधिराम राय, मदारीहाट से लक्ष्मण लिम्बु, धुपगुड़ी से नरेश चंद्र राय, मयनागुड़ी से कौशिक राय और जलपाईगुड़ी से अनंत देव अधिकारी को मैदान में उतारा है। इसके अलावा कलिम्पोंग से भरत छेत्री और दार्जिलिंग से नोमन राय को भी टिकट दिया गया है। अन्य सीटों पर भी कई स्थानीय चेहरों को मौका दिया गया है। कर्सियांग से सोनम लामा, इटाहार से सबिता बर्मन, हरिशचंद्रपुर से रतन दास, बैष्णवनगर से राजू कर्माकर और फरक्का से सुनील चौधरी को उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं समसेरगंज से षष्ठी चरण घोष, रानीनगर से राणा प्रताप सिंह राय और नबग्राम से दिलीप साहा को भी टिकट मिला है।


बीजेपी ने इस सूची में विशेष रूप से उन सीटों पर ध्यान केंद्रित किया है, जहां पिछले चुनाव में पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया था या जहां इस बार जीत की संभावना अधिक है। जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों का चयन किया गया है, ताकि अधिक से अधिक मतदाताओं को आकर्षित किया जा सके।