BRICS Summit 2023: ईरान के राष्ट्रपति की भारत यात्रा का महत्व और कूटनीतिक संकेत
ईरान के राष्ट्रपति की भारत यात्रा
नई दिल्ली: भारत में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में कई प्रमुख वैश्विक नेता शामिल हुए, जिनमें ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात ने विशेष ध्यान आकर्षित किया। इस सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा जैसे नेता भी उपस्थित थे। ईरानी राष्ट्रपति की यह पहली भारत यात्रा कई दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जबकि ईरान अमेरिका और इजरायल के साथ तनाव और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, भारत में उनकी उपस्थिति और शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है।
भारत के लिए ईरान का महत्व
ईरान केवल पश्चिम एशिया का एक देश नहीं है, बल्कि भारत के लिए यह एक महत्वपूर्ण रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा साझेदार है। चाबहार बंदरगाह, ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार, मध्य एशिया तक पहुंच और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे भारत के लिए ईरान के साथ संबंध बनाए रखने की आवश्यकता को दर्शाते हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, भारत के लिए सभी प्रमुख पक्षों के साथ संवाद बनाए रखना आवश्यक है।
चाबहार पोर्ट का महत्व
ईरान का चाबहार बंदरगाह भारत की प्रमुख रणनीतिक परियोजनाओं में से एक है। यह भारत को पाकिस्तान को पार किए बिना अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक व्यापारिक पहुंच प्रदान करता है। यह बंदरगाह भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर के लिए भी महत्वपूर्ण है।
ईरान के साथ मजबूत संबंध भारत को यूरेशिया के बाजारों तक वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं, जिससे चाबहार भारत-ईरान संबंधों का एक महत्वपूर्ण आधार बनता है।
ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री सुरक्षा
भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। पश्चिम एशिया में किसी भी बड़े तनाव का कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति पर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए, ईरान के साथ संवाद बनाए रखना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, लाल सागर और बाब-अल-मंदेब क्षेत्र में हूती समूह की गतिविधियों ने समुद्री व्यापार के लिए नई चुनौतियां उत्पन्न की हैं।
भारत का पश्चिम एशिया और यूरोप के साथ बड़ा व्यापार इन समुद्री मार्गों की स्थिरता पर निर्भर करता है, इसलिए क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ संपर्क बनाए रखना आवश्यक है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा
फारस की खाड़ी और वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य अत्यंत महत्वपूर्ण है। पश्चिम एशिया से भारत आने वाली ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार की सुरक्षा इस क्षेत्र की स्थिरता से सीधे जुड़ी हुई है। मौजूदा तनाव के बीच, भारत के लिए इस क्षेत्र में किसी भी बड़े संकट को रोकना आवश्यक है।
भारत और ईरान का ऐतिहासिक संबंध
भारत और ईरान के संबंध केवल वर्तमान राजनीति तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, भाषाई, व्यापारिक और सभ्यतागत संबंधों का एक लंबा इतिहास है। यह पुराना जुड़ाव दोनों देशों के रिश्तों को एक विशेष आधार प्रदान करता है। इसके साथ ही, भारत अमेरिका, रूस, इजरायल, अरब देशों और ईरान के साथ अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार संबंध बनाए रखना चाहता है। ईरान के साथ निरंतर संवाद भारत की स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति को मजबूत करता है।
BRICS Summit में शामिल नेता
इस सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो और मिस्र के राष्ट्रपति अबदुल फतेह अल-सीसी शामिल हुए।
इसके अलावा, बुरुंडी के राष्ट्रपति एवरिस्ट नदायिशिमिये, कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम जोमार्ट, फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर, ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा, इथियोपिया के प्रधानमंत्री आबी अहमद अली, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, नाइजीरिया के उपराष्ट्रपति काशिम शेट्टिमा, युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो और यूएई के युवराज शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान भी सम्मेलन में शामिल हुए।