BRICS Summit 2026: भारत ने वैश्विक कूटनीति में अपनी स्थिति को मजबूत किया
नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन
नई दिल्ली: भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन ने नई दिल्ली को वैश्विक कूटनीति का एक प्रमुख केंद्र बना दिया। तीन दिनों तक चले इस महत्वपूर्ण आयोजन में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) की आवाज को मजबूती से उठाया और भारत की विदेश नीति से जुड़ी जटिल चुनौतियों का समाधान किया। इस दौरान, पीएम मोदी ने दो महत्वपूर्ण शिखर संबोधनों के साथ-साथ 15 द्विपक्षीय औपचारिक बैठकें भी कीं। भारत ने वैश्विक संघर्षों और चीन के साथ सीमा पर बने संवेदनशील हालातों के बीच अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया।
व्लादिमीर पुतिन के साथ महत्वपूर्ण वार्ता
शिखर सम्मेलन के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजरें थीं। पश्चिमी देशों के दबाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के बावजूद, दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और बुनियादी ढांचे जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की। भारत और रूस ने 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर फिर से जोर दिया।
चीनी राष्ट्रपति का भारत दौरा
पीएम मोदी ने युद्ध के समाधान पर भारत के स्पष्ट रुख को दोहराते हुए कहा कि रणभूमि में समस्याओं का समाधान नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही, भारत ने चीन के साथ मिलकर यूक्रेन में शांति स्थापित करने के प्रयासों में मदद की पेशकश की। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, सात वर्षों के लंबे अंतराल के बाद भारत दौरे पर आए। पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता को सीमावर्ती तनाव को कम करने और संबंधों में स्थिरता लाने के एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। बातचीत के दौरान, भारत ने स्पष्ट किया कि आपसी मतभेदों को विवाद में नहीं बदलने दिया जाना चाहिए। विदेश मंत्रालय के अनुसार, पीएम मोदी ने सीमा प्रबंधन से जुड़े मौजूदा समझौतों और सहमतियों के कड़ाई से पालन की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत ने अपने रुख को रेखांकित करते हुए कहा कि संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए 'तीन आपसी स्तंभों' यानी परस्पर सम्मान, परस्पर संवेदनशीलता और परस्पर हितों का ध्यान रखना अनिवार्य है।
ईरान के राष्ट्रपति से मुलाकात
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य संघर्ष और लाल सागर में समुद्री व्यापार मार्गों पर मंडराते खतरों के बीच पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की मुलाकात बेहद महत्वपूर्ण रही। यह दो हफ्तों से भी कम समय में दोनों नेताओं की दूसरी व्यक्तिगत बातचीत थी। सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी द्वारा ईरानी राष्ट्रपति का हाथ थामकर उन्हें भारत मंडपम के मुख्य मंच तक ले जाने की तस्वीर वैश्विक मीडिया में छाई रही। भारत ने बातचीत के जरिए विवादों को सुलझाने की वकालत करते हुए नाविकों की सुरक्षा और जहाजरानी की स्वतंत्रता को बहाल करने पर बल दिया। इसी क्रम में पीएम मोदी ने नाविकों के लिए 'सीफारर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क' नाम से एक साझा सुरक्षा तंत्र स्थापित करने का भी प्रस्ताव रखा।