BRICS Summit 2026: शी जिनपिंग ने वैश्विक शांति के लिए उठाई आवाज
नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन
नई दिल्ली: भारत की मेज़बानी में चल रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मध्य पूर्व और गल्फ क्षेत्र में जारी संघर्षों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में युद्ध की आग ने आम नागरिकों को गंभीर नुकसान पहुँचाया है। जिनपिंग ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने यह स्पष्ट किया कि यह हिंसा और तनाव सभी के साझा हितों के खिलाफ है, और नए संघर्षों से बचना आवश्यक है। चीन लंबे समय से ब्रिक्स को 'ग्लोबल साउथ' की एक सशक्त आवाज बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
वैश्विक गवर्नेंस पर चर्चा
इस दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में न केवल युद्ध और शांति पर चर्चा हो रही है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय गवर्नेंस के ढांचे में सुधार, आर्थिक सहयोग और विकासशील देशों के मुद्दों पर भी गहन विचार-विमर्श हो रहा है। जब दुनिया के प्रमुख नेता नए सुरक्षा समीकरणों पर चर्चा कर रहे हैं, तब चीन की पहल सम्मेलन का मुख्य आकर्षण बन गई है।
ब्रिक्स देशों से सही पक्ष में खड़े होने की अपील
अपने संबोधन में, शी जिनपिंग ने ब्रिक्स के सदस्य देशों से अपील की कि वे वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए एक मजबूत स्तंभ बनें। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक स्थिति में ब्रिक्स देशों को इतिहास के 'सही पक्ष' में मजबूती से खड़ा होना चाहिए। जिनपिंग ने यह भी कहा कि वैश्विक सुरक्षा से जुड़े जटिल मुद्दों पर सभी देशों को आपसी तालमेल और कूटनीतिक सहयोग को और गहरा करने की आवश्यकता है।
चीन 2027 में ब्रिक्स की मेज़बानी करेगा
राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने यह भी घोषणा की कि चीन 2027 में ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता करेगा और 19वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन से लेकर मध्य पूर्व तक संघर्ष चल रहे हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर प्रभाव डाल रहे हैं। चीन ने हमेशा ब्रिक्स को विकासशील देशों की आवाज के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम किया है।