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BRICS शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का प्रभावशाली भाषण: तकनीक और मिनरल्स पर उठाए सवाल

The 18th BRICS summit concluded with a significant speech by PM Narendra Modi, addressing the dangers of monopolizing technology and critical minerals. He proposed three key initiatives to enhance agricultural development and emphasized the importance of inclusivity in technology use. Modi's remarks directly challenged China's dominance in the global supply chain, advocating for a collaborative approach among nations. His closing statements highlighted the growing trust of the Global South in BRICS, underscoring the organization's strength in diversity and mutual cooperation. This article delves into the key points of Modi's address and the implications for international relations.
 

नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का समापन


नई दिल्ली: 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का अंतिम दिन वैश्विक कूटनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। इस मंच पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सामने, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसा रणनीतिक भाषण दिया, जो विश्व के विभिन्न शक्ति केंद्रों में गूंज रहा है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में किसी विशेष देश का नाम लिए बिना यह स्पष्ट किया कि तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों का वर्चस्व बनाना मानवता की प्रगति के लिए खतरा है।


कृषि क्षेत्र के लिए तीन महत्वपूर्ण प्रस्ताव

कृषि क्षेत्र के लिए तीन बड़े वैश्विक प्रस्ताव


प्रधानमंत्री ने साझा विकास को बढ़ावा देने के लिए तीन प्रमुख सुझाव दिए। पहला, नवाचार और बड़े पैमाने पर समस्याओं के समाधान के लिए ब्रिक्स फंड की स्थापना की जाए। दूसरा, स्टार्टअप्स और इनक्यूबेटर्स को जोड़ने के लिए एक मजबूत डिजिटल नेटवर्क विकसित किया जाए।
तीसरा, कृषि क्षेत्र में एआई, भू-स्थानिक तकनीक और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को जमीनी जरूरतों से जोड़ा जाए, ताकि छोटे किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंच सके और उनकी आय व उत्पादकता में सुधार हो।


मिनरल्स के वर्चस्व पर उठाए सवाल

मिनरल्स को हथियार बनाने पर जताई आपत्ति


प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान सीधे तौर पर चीन के उस दबदबे पर चोट करता है, जिसके माध्यम से वह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करता आया है। वर्तमान में इलेक्ट्रिक वाहनों, एआई डेटा सेंटर, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण में उपयोग होने वाले 90 प्रतिशत से अधिक दुर्लभ पृथ्वी खनिजों की रिफाइनिंग क्षमता पर चीन का नियंत्रण है। अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव के दौरान, बीजिंग ने कई बार इन खनिजों के निर्यात पर पाबंदियां लगाकर वैश्विक बाजार को प्रभावित किया है। पीएम मोदी ने इसी नीति की आलोचना करते हुए कहा कि तकनीक का उपयोग समावेशी होना चाहिए, न कि किसी एक देश का एकाधिकार। किसी भी संसाधन को कूटनीतिक या व्यापारिक हथियार बनाना विकासशील देशों की प्रगति को बाधित कर सकता है।


ग्लोबल साउथ का बढ़ता विश्वास

ग्लोबल साउथ का बढ़ता विश्वास और ब्रिक्स की ताकत


अपने समापन भाषण में पीएम मोदी ने ब्रिक्स की वास्तविक क्षमता को उजागर करते हुए कहा कि इस संगठन की असली ताकत इसकी विविधता और आपसी सहयोग की भावना में निहित है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि आज 'ग्लोबल साउथ' के देशों का ब्रिक्स पर विश्वास लगातार बढ़ रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि यहां हर देश की आवाज सुनी जाती है, उनके अनुभवों का सम्मान होता है और समाधान किसी पर थोपे नहीं जाते, बल्कि मिलकर तैयार किए जाते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि ब्रिक्स की यह विविधता हमेशा इसकी पहचान बनी रहेगी और इसकी प्रगति मानवता के कल्याण में सहायक होगी।