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CJP की चेतावनी: छात्रों पर कार्रवाई की गई तो होगा बड़ा प्रदर्शन

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार को चेतावनी दी है कि यदि छात्रों को परेशान किया गया, तो देशभर में बड़ा शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जाएगा। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि आंदोलन वापस लेने का कारण सरकार का भरोसा था। पार्टी ने SC के निर्देशों पर भी सवाल उठाए हैं और सरकार से वादे निभाने की मांग की है। CJP ने स्पष्ट किया है कि यदि वादे पूरे नहीं हुए, तो अगला आंदोलन पहले से बड़ा होगा।
 

नई दिल्ली में CJP का आक्रामक रुख


नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के हालिया अंतरिम आदेश के बाद, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने एक बार फिर से अपनी आक्रामकता दिखाई है। पार्टी ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि आंदोलन से जुड़े छात्रों को परेशान किया गया, तो देशभर में एक बड़ा शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जाएगा।


दीपके की अपील: छात्रों को परेशान करना बंद करें

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "यदि पुलिस छात्रों को लगातार परेशान करती रही, तो CJP बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होगी। सरकार को इस विच-हंटिंग को तुरंत रोकना होगा।" दीपके ने स्पष्ट किया कि आंदोलन को वापस लेने का कारण सरकार का भरोसा था, न कि कमजोरी।


CJP की आपत्ति SC के निर्देश पर

CJP नेता सौरव दास ने CJI सूर्यकांत की बेंच द्वारा जारी अंतरिम आदेश पर सवाल उठाए हैं, विशेषकर निर्देश संख्या 4 पर। इस निर्देश में सरकारों को मौजूदा FIR पर आगे की जांच की अनुमति दी गई है।


दास ने कहा, "यह आदेश 25 जुलाई 2026 को सरकार द्वारा युवाओं को दिए गए वादे के खिलाफ है। उस दिन सरकार ने कहा था कि सभी FIR वापस ली जाएंगी और किसी प्रदर्शनकारी को निशाना नहीं बनाया जाएगा।"


आंदोलन वापस लेने का कारण आश्वासन था

सौरव दास ने याद दिलाया कि CJP ने केंद्र सरकार के लिखित आश्वासन के बाद ही अपना विरोध स्थगित किया था। उनका आरोप है कि अब केंद्र और बीजेपी शासित राज्य सरकारें इस कोर्ट के आदेश का बहाना बनाकर छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को बनाए रखना चाहती हैं। "शुरू से ही यह डर था कि शांतिपूर्ण असहमति को दबाने के लिए अदालतों का इस्तेमाल होगा।"


पार्टी ने यह भी कहा कि सुनवाई के दौरान सरकारी वकीलों ने कोर्ट को 25 जुलाई के समझौते की जानकारी नहीं दी। "बिना पूरी जानकारी के आया यह आदेश हमें स्वीकार्य नहीं है। यह हजारों युवाओं के विश्वास के साथ धोखा है।"


सरकार के हाथ में है FIR वापस लेना

CJP ने तर्क दिया कि SC ने FIR दर्ज करना अनिवार्य नहीं किया है। बिहार और असम की सरकारें पहले ही मामले वापस ले चुकी हैं। इसलिए केंद्र और राज्य सरकारें अब भी 25 जुलाई का वादा निभा सकती हैं।


दास ने मांग की कि सरकार तुरंत कोर्ट में अपना लिखित आश्वासन पेश करे। साथ ही, प्रदर्शन से जुड़े सभी छात्रों पर दर्ज केस रद्द करने और भविष्य में किसी भी कार्रवाई की गारंटी देने की आवश्यकता है।


CJP की अंतिम चेतावनी

CJP ने कहा कि सरकार को वादा निभाने के लिए दी गई समय-सीमा आज समाप्त हो रही है। यदि वादे पूरे नहीं हुए, तो "देश की सड़कें फिर युवाओं की आवाज से गूंजेंगी।" पार्टी ने स्पष्ट किया कि अगला आंदोलन पहले से बड़ा और शांतिपूर्ण होगा।