IIT-Roorkee की नई एडवाइजरी पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
IIT-Roorkee की आंतरिक एडवाइजरी पर विवाद
IIT-Roorkee द्वारा जारी की गई एक आंतरिक सलाह ने चर्चा का विषय बना लिया है। संस्थान ने अपने छात्रों और कर्मचारियों को बिना अनुमति के किसी भी राजनीतिक गतिविधि, सार्वजनिक टिप्पणी या मीडिया में बयान देने से बचने की सलाह दी है। इस पर अब राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ भी सामने आ रही हैं।
संस्थान की ओर से जारी निर्देश
20 जुलाई को IIT-Roorkee के रजिस्ट्रार द्वारा भेजे गए ईमेल में बताया गया कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर राजनीतिक आंदोलनों के समर्थन या आलोचना में अपनी राय साझा कर रहे हैं। ईमेल में छात्रों, कर्मचारियों और अन्य हितधारकों को याद दिलाया गया कि उनका मुख्य उद्देश्य शिक्षा, अनुसंधान और ज्ञान के क्षेत्र में कार्य करना है। संस्थान ने कहा कि आचार संहिता के अनुसार बिना अनुमति के किसी भी राजनीतिक चर्चा या गतिविधि में भाग लेना मना है। इसके साथ ही, मीडिया या सार्वजनिक मंच पर ऐसे बयानों से बचने की सलाह दी गई है, जो संस्थान या सरकार के संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं।
नई नीति का दावा नहीं
यह एडवाइजरी उस समय आई है जब देश में छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शन चर्चा में हैं। हालांकि, ईमेल में किसी विशेष राजनीतिक दल या संगठन का उल्लेख नहीं किया गया। उसी दिन IIT-Roorkee ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट में कहा कि किसी भी छात्र या कर्मचारी की व्यक्तिगत राय को संस्थान की आधिकारिक राय नहीं माना जाना चाहिए। मीडिया इंचार्ज सोनिका श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि यह हर शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में जारी होने वाली सामान्य आंतरिक सलाह है और इसे गलत संदर्भ में नहीं लिया जाना चाहिए।
महुआ मोइत्रा की प्रतिक्रिया
इस एडवाइजरी के प्रकाश में आने के बाद तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने इसकी आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि सार्वजनिक धन से चलने वाले संस्थानों को छात्रों के बोलने और विरोध करने के संवैधानिक अधिकार का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने संस्थान से इस ईमेल को वापस लेने और माफी मांगने की मांग की। दूसरी ओर, IIT-Roorkee का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल संस्थान के आचार नियमों की जानकारी देना है।