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ITR 2026: शेड्यूल AL की जानकारी और भरने की प्रक्रिया

इस लेख में, हम ITR 2026 में शेड्यूल AL की आवश्यकता और भरने की प्रक्रिया पर चर्चा करेंगे। यदि आपकी व्यवसाय आय ₹1 करोड़ से अधिक है, तो आपको अपनी संपत्तियों और देनदारियों की जानकारी प्रदान करनी होगी। जानें कि यह जानकारी क्यों महत्वपूर्ण है और इसे कैसे सही तरीके से भरा जाए।
 

ITR 2026: शेड्यूल AL की आवश्यकता

अगर आपके व्यवसाय की आय वित्त वर्ष 2025-26 में ₹1 करोड़ से अधिक है, तो आपको 31 अगस्त की अंतिम तिथि से पहले इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय अतिरिक्त जानकारी प्रदान करनी होगी। आपको अपनी आय के विवरण के साथ-साथ संबंधित ITR फॉर्म के 'शेड्यूल AL' के तहत अपनी संपत्तियों और देनदारियों की जानकारी भी देनी होगी।


टैक्स चोरी को रोकने का उद्देश्य

टैक्स विभाग की वेबसाइट पर कहा गया है, "शेड्यूल AL उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUFs) पर लागू होता है जिनकी कुल आय वित्त वर्ष में ₹1 करोड़ से अधिक होती है। इस शेड्यूल के अंतर्गत साल के अंत में मौजूद संपत्तियों और देनदारियों की जानकारी देना अनिवार्य है।" यह जानकारी देने का उद्देश्य वित्तीय पारदर्शिता को बढ़ावा देना और टैक्स चोरी को रोकना है।


कौन भर सकता है Schedule AL?

Schedule AL उन व्यक्तिगत और HUF टैक्सपेयर्स पर लागू होता है जिनकी आय व्यवसाय या पेशे से होती है। यह उन लोगों पर भी लागू होता है जिनकी आय ₹1 करोड़ से अधिक है, भले ही वे व्यवसाय से न हों। आप अपनी आय के आधार पर ITR-2 और ITR-3 में यह जानकारी दे सकते हैं।


Schedule AL में आवश्यक जानकारी

Schedule AL में, टैक्सपेयर को निम्नलिखित संपत्तियों की जानकारी देनी होती है:



  • अचल संपत्ति: जैसे कि जमीन और इमारतें

  • चल संपत्ति: जैसे कि गाड़ियां, गहने, पुरातात्विक संग्रह, शेयर और सिक्योरिटीज।

  • नकद: 31 मार्च 2026 तक मौजूद नकद राशि।

  • अन्य कीमती सामान: कोई भी वस्तु जिसकी मौद्रिक कीमत हो।


इसके अलावा, करदाता को इन संपत्तियों से संबंधित देनदारियों की जानकारी भी देनी होगी, जैसे कि संपत्ति के लिए लिए गए लोन।


Schedule AL भरने से पहले ध्यान देने योग्य बातें

करदाता को अपने संबंधित ITR फॉर्म में Schedule AL भरते समय निम्नलिखित दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए:



  • संपत्ति की जानकारी उसकी लागत पर देनी चाहिए।

  • अनिवासी व्यक्तियों को केवल भारत में मौजूद अपनी संपत्तियों का विवरण देना होगा।

  • यदि संपत्ति किसी गिफ्ट या वसीयत के माध्यम से मिली है, तो उसकी लागत पिछले मालिक द्वारा बताई गई लागत होगी।

  • यदि संपत्ति की लागत ज्ञात नहीं है, तो उसकी कीमत का अनुमान सर्कल रेट या बुलियन रेट के आधार पर लगाया जा सकता है।