LPG संकट पर संसद में गरमाई सियासत: विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल
संसद में एलपीजी संकट पर हंगामा
नई दिल्ली: देश में एलपीजी की कमी को लेकर राजनीतिक माहौल गरम हो गया है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण गैस आपूर्ति पर संभावित प्रभाव को लेकर विपक्ष ने संसद में जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया।
सर्वदलीय बैठक से पहले, बुधवार को विपक्षी दलों के सांसदों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन करते हुए एलपीजी की किल्लत को एक गंभीर मुद्दा बताया। उनका कहना है कि सरकार इस संकट का समाधान करने में असफल रही है, जिससे आम जनता को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार पर उठाए गए सवाल
तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत राय ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए हैं। उन्होंने बताया कि लोग एलपीजी की कमी से परेशान हैं और विपक्ष चाहता है कि इसका समाधान शीघ्र किया जाए।
राउत का बयान: ट्रंप से नहीं, विपक्ष से बात करें
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्रंप से ज्यादा विपक्ष के नेताओं से बातचीत करनी चाहिए।" उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे पर पहल हो रही है और पाकिस्तान भी मध्यस्थता के लिए तैयार है।
कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने सरकार के दावों को खारिज करते हुए कहा, "भाजपा झूठ बोल रही है कि सब कुछ ठीक है। आप कहीं भी जाइए, वहां एलपीजी का संकट बना हुआ है। नवरात्रि और ईद के समय लोगों को सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। इसलिए हम संसद परिसर में इसके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।"
विपक्ष का एकजुट प्रदर्शन
इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, एनसीपी (शरद पवार गुट) की नेता सुप्रिया सुले, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव समेत कई दलों के सांसद शामिल हुए। सांसदों ने 'एम्पिटी सिलेंडर, एम्पिटी प्रॉमिसेस' लिखे बैनर के साथ प्रदर्शन किया और 'मोदी जी, एलपीजी' के नारे लगाए।
आज होगी सर्वदलीय बैठक
पश्चिम एशिया संकट और देश में ईंधन आपूर्ति को लेकर सरकार ने आज शाम सर्वदलीय बैठक बुलाई है। विपक्ष इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग कर रहा है।
पीएम मोदी का बयान
राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट उत्पन्न कर दिया है।
उन्होंने कहा, "इस युद्ध से हमारे व्यापार के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं। इससे पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरक जैसे आवश्यक सामान की नियमित आपूर्ति बाधित हो रही है।"
उन्होंने यह भी कहा कि खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा और आजीविका सरकार की प्राथमिकता है और भारत कूटनीति के माध्यम से शांति बहाली का प्रयास कर रहा है।