Mohan Bhagwat का बड़ा बयान: RSS और BJP के बीच कार्यप्रणाली में अंतर
आरएसएस प्रमुख का स्पष्ट संदेश
Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और संघ के बीच विचारधारा में समानता हो सकती है, लेकिन दोनों की कार्यप्रणाली और निर्णय लेने की प्रक्रिया में भिन्नता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह धारणा गलत है कि आरएसएस भाजपा के अध्यक्ष का चयन करता है या पार्टी का राजनीतिक दिशा-निर्देश तय करता है।
हम अपने-अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं
प्रेस कॉन्फ्रेंस में भागवत ने कहा कि मैं पिछले 50 वर्षों से शाखा चला रहा हूं, इसलिए यदि कोई मुझसे सलाह लेता है, तो मैं उस क्षेत्र में विशेषज्ञ हूं। राजनीतिक दल लंबे समय से राज्य संचालन कर रहे हैं, इसलिए वे भी अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने कहा कि सुझाव दिए जा सकते हैं, लेकिन निर्णय लेना संबंधित संगठन का अधिकार है।
निर्णय प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करते: भागवत
भागवत ने मुस्कुराते हुए कहा कि यदि हम निर्णय लेते, तो क्या इसमें इतना समय लगता? यह टिप्पणी भाजपा के भीतर अध्यक्ष पद की चर्चा के संदर्भ में थी। उन्होंने स्पष्ट किया, “हम निर्णय नहीं करते और न ही करना चाहते हैं। हर संगठन को अपने समय और तरीके से निर्णय लेने देना चाहिए।”
भाजपा अध्यक्ष को लेकर अटकलें
भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल दो साल पहले समाप्त हो चुका है और वे अब कार्यकाल विस्तार पर हैं। नए अध्यक्ष के लिए अटकलें जारी हैं, जिनमें शिवराज सिंह चौहान की मोहन भागवत से मुलाकात को भी संभावनाओं से जोड़ा जा रहा है। हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
महिला अध्यक्ष को लेकर चर्चाएं
पार्टी के अंदरूनी हलकों में चर्चा है कि भाजपा इस बार किसी महिला को पार्टी अध्यक्ष नियुक्त कर सकती है। संभावित नामों में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, आंध्र प्रदेश की वरिष्ठ नेता डी. पुरंदेश्वरी और भाजपा महिला मोर्चा प्रमुख वनाथी श्रीनिवासन शामिल हैं।
आरएसएस की भूमिका वैचारिक
भाजपा और उसके पूर्ववर्ती संगठन जनसंघ में आरएसएस की भूमिका हमेशा वैचारिक रही है। दोनों पक्षों के नेता मानते हैं कि संघ केवल विचारों का मार्गदर्शन करता है, जबकि परिचालन से जुड़े निर्णय पूरी तरह से राजनीतिक नेतृत्व के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
हर अच्छे कार्य में सहयोग देने को तैयार
भागवत ने अंत में कहा कि हम किसी भी अच्छे कार्य के लिए मदद को तैयार रहते हैं। केवल भाजपा ही नहीं, जो भी संगठन राष्ट्रहित के कार्यों के लिए हमारी मदद चाहता है, हम साथ खड़े होते हैं। संघ के कार्यकर्ता आवश्यकता पड़ने पर राजनीतिक संगठनों की भी मदद करते हैं, लेकिन बिना किसी हस्तक्षेप के।