NEET-UG परीक्षा में धांधली: फास्ट ट्रैक कोर्ट की पहली सुनवाई में CBI की अनुपस्थिति पर उठे सवाल
नई दिल्ली में NEET-UG परीक्षा धांधली की सुनवाई
नई दिल्ली: नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में धांधली और पेपर लीक के मामलों के लिए गठित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट की शुरुआत निराशाजनक रही। सोमवार को निर्धारित पहली सुनवाई के दौरान केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) का कोई वकील अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। इस पर अदालत ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए मामले की कार्यवाही को टाल दिया और सरकार को स्थायी लोक पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने का निर्देश दिया।
जमानत याचिका पर होनी थी बहस
दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत की जज अनु ग्रोवर बलीगा के समक्ष नीट धांधली के आरोपियों बिकास बिवाल और दिनेश बिवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई होनी थी। ये दोनों आरोपी सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए गए 13 मुख्य आरोपियों में शामिल हैं, जिन पर प्रश्नपत्र लीक होने के बाद उसे अभ्यर्थियों तक पहुंचाने का गंभीर आरोप है। अदालत में आरोपियों के वकील एपी सिंह समय पर उपस्थित रहे, लेकिन सीबीआई की ओर से किसी भी विधिक प्रतिनिधि के न पहुंचने के कारण सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी। अदालत ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अगली सुनवाई की तारीख 3 अगस्त तय की है।
सख्त कानून और फास्ट ट्रैक व्यवस्था
परीक्षाओं में धांधली को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने 'सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2024' लागू किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में यह घोषणा की थी कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले मामलों के लिए विशेष अदालतों का गठन किया जाएगा।
दोषी पाए जाने पर 10 वर्ष तक की कठोर कैद की सजा का प्रावधान है।
आर्थिक दंड की राशि को लगभग पांच गुना तक बढ़ा दिया गया है। हाल ही में कानून को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए संसद में संशोधन विधेयक भी पेश किया गया है।
राजनीतिक गरमाहट और विरोध
नीट-यूजी परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। जंतर-मंतर पर विभिन्न छात्र संगठनों और विपक्षी दलों द्वारा लगातार प्रदर्शन किए गए हैं। हाल ही में हुए संसद मार्च के दौरान छात्रों पर पुलिस बल प्रयोग के बाद विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार की घेराबंदी तेज कर दी है। प्रशासनिक मोर्चे पर शिक्षा मंत्रालय ने भी मामले की निष्पक्ष जांच और पारदर्शी व्यवस्था बहाल करने का आश्वासन दिया है। फास्ट ट्रैक कोर्ट की पहली तारीख पर अभियोजन पक्ष का गायब रहना न्यायिक प्रक्रिया की गति पर सवाल खड़े करता है, जिसे लेकर अदालत ने सरकार को अगली तारीख पर अनिवार्य रूप से नियुक्त सरकारी वकील भेजने का आदेश दिया है.