NLSIU छात्रों का CJI और BCI चेयरमैन के खिलाफ विरोध: क्या है असहमति का कारण?
मुख्य न्यायाधीश के दीक्षांत समारोह में शामिल होने का विरोध
नई दिल्ली: बेंगलुरु में स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) के छात्रों और पूर्व छात्रों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के विश्वविद्यालय के आगामी दीक्षांत समारोह में भाग लेने का विरोध किया है। यह विरोध हाल ही में हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों के साथ हुए विवाद के बाद उत्पन्न हुआ है।
700 से अधिक छात्रों ने किया हस्ताक्षर
15 अगस्त को जारी एक बयान पर NLSIU के 2026 बैच के 165 स्नातक छात्रों, 409 वर्तमान छात्रों और 128 पूर्व छात्रों ने हस्ताक्षर किए हैं। इस बयान में कुल 702 हस्ताक्षर हैं, जिसमें NALSAR के छात्रों और फैकल्टी के प्रति एकजुटता व्यक्त की गई है। छात्रों का मानना है कि दीक्षांत समारोह उनके शैक्षणिक जीवन का एक महत्वपूर्ण क्षण होता है, और ऐसे में उन व्यक्तियों को आमंत्रित करना जिनके आचरण पर छात्रों को गंभीर आपत्ति है, उन्हें अपमानजनक लगता है।
NALSAR विवाद का संदर्भ
NLSIU समुदाय ने BCI द्वारा NALSAR के 2026 बैच के छात्रों के नामांकन को लेकर जारी किए गए निर्देश पर भी सवाल उठाए हैं, जो बाद में वापस ले लिए गए थे। पहले BCI ने राज्य बार काउंसिलों को NALSAR के 2026 स्नातकों के नामांकन पर रोक लगाने का निर्देश दिया था, लेकिन बाद में इसे वापस ले लिया गया। NLSIU के छात्रों ने BCI से NALSAR समुदाय से बिना शर्त माफी मांगने की अपील की है, और आरोप लगाया है कि छात्रों की असहमति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कार्रवाई करने का प्रयास किया गया है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर चिंता
छात्रों ने BCI की कार्रवाई को लेकर संवैधानिक अधिकारों और अकादमिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों को उठाया है। उनका कहना है कि छात्रों को अपनी राय व्यक्त करने के लिए दबाव में नहीं डाला जाना चाहिए। हालांकि BCI ने NALSAR मामले में अपना पूर्व आदेश वापस ले लिया है और चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने छात्रों से माफी भी मांगी है, लेकिन NLSIU के छात्रों का कहना है कि ऐसी कार्रवाई का आरंभ होना ही चिंता का विषय है।