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TMC Crisis: 20 MPs Shift Support to NDA

In a dramatic turn of events, 20 MPs from the Trinamool Congress (TMC) have declared their support for the NDA, signaling a potential shift in West Bengal's political landscape. This decision comes amidst growing dissatisfaction with the leadership of Mamata Banerjee, as evidenced by recent resignations and meetings with BJP officials. The internal strife within TMC raises questions about its future and the implications for upcoming elections. As the political drama unfolds, the party's stability is under scrutiny, making this a crucial moment for both TMC and the NDA.
 

TMC MPs Break Away from Mamata Banerjee


लोकसभा स्पीकर को दी गई जानकारी, एक राज्यसभा सांसद ने भी दिया इस्तीफा


कोलकाता से आई खबरों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का साथ छोड़ दिया है। लोकसभा में टीएमसी के 28 सांसद हैं, जिनमें से 20 ने एनडीए सरकार का समर्थन करने का निर्णय लिया है। सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को समर्थन देने की सूचना दे दी है।


जल्द ही स्पीकर को एक पत्र भी भेजा जाएगा। वर्तमान में लोकसभा में टीएमसी के 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं। इससे पहले, 3 जून को बंगाल के 80 में से 58 विधायक एक अलग गुट बना चुके हैं, जिसमें ऋतब्रत को नेता चुना गया है।


सांसदों की बैठक भाजपा प्रभारी के साथ

इन सांसदों में से 11 ने सोमवार को केंद्रीय मंत्री और भाजपा के बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव के घर पर बैठक की। इस दौरान बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी उपस्थित रहे। इस बैठक में काकोली घोष, शताब्दी रॉय, अबू ताहिर, अरूप चक्रवर्ती, खलीलुर रहमान, शर्मिला सरकार, असित मल, कालीपद सोरेन, जगदीश बसुनिया और प्रसून बनर्जी शामिल थे।


टीएमसी सांसदों की अनौपचारिक बैठक

रविवार की रात, टीएमसी के 20 सांसदों ने दिल्ली में एक अनौपचारिक बैठक की, जिसमें उन्होंने मौजूदा नेतृत्व के प्रति असंतोष व्यक्त किया। इस बैठक की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसमें कई सांसद एक मेज के चारों ओर बैठे दिखाई दे रहे थे।


ममता के शासन पर उठे सवाल

टीएमसी के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर ने आज सुबह राज्यसभा सांसद पद से इस्तीफा दे दिया और पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने त्यागपत्र में ममता के 15 साल के शासन को पार्टी की हार का कारण बताया और भाजपा की प्रशंसा की।


राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। सुखेंदु ने मीडिया से कहा कि पार्टी के कई सदस्य ममता के तानाशाही रवैये के कारण असंतुष्ट थे, जिससे उन्होंने इस्तीफा देने का निर्णय लिया।