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TRAI की नई नीतियों से इंटरनेट पर टीवी देखने का अनुभव बदल सकता है

भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) इंटरनेट पर टीवी सेवाओं को नियंत्रित करने की योजना बना रहा है। इस कदम से स्मार्ट टीवी और कनेक्टेड डिवाइस के उपयोगकर्ताओं के अनुभव में बदलाव आ सकता है। केबल और DTH ऑपरेटरों की मांग के बीच, टेक कंपनियों ने इस नियमन का विरोध किया है। यदि यह लागू होता है, तो दर्शकों को नए नियमों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे मुफ्त टीवी का युग समाप्त हो सकता है। जानें इस विषय में और क्या हो सकता है।
 

स्मार्ट टीवी और कनेक्टेड डिवाइस का बढ़ता चलन

नई दिल्ली: देश में स्मार्ट टीवी और कनेक्टेड उपकरणों की बढ़ती लोकप्रियता के बीच, इंटरनेट पर टीवी देखने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव संभव है। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) इंटरनेट पर प्रसारित टीवी सेवाओं को नियंत्रित करने की योजना बना रहा है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के निर्देश पर, TRAI फ्री ऐड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टीवी (FAST) और ऐप-आधारित लीनियर टीवी डिस्ट्रीब्यूशन (ALTD) को एक सख्त नियामक ढांचे और लाइसेंसिंग के दायरे में लाने की सिफारिश कर सकता है। इस संभावित कदम ने देश की ब्रॉडकास्टिंग और टेक उद्योग को दो धड़ों में बांट दिया है।


केबल और DTH ऑपरेटरों की मांग

केबल-डीटीएच ऑपरेटरों की बराबरी की मांग, टेक कंपनियों ने खोला मोर्चा
पारंपरिक केबल और DTH ऑपरेटरों का कहना है कि वे टैरिफ निर्धारण, उपभोक्ता संरक्षण और सख्त कंटेंट कोड के नियमों से बंधे हैं, जबकि इंटरनेट पर वही चैनल दिखाने वाले प्लेटफार्म पूरी तरह से नियमों से मुक्त हैं। दूसरी ओर, ओटीटी और टेक कंपनियों ने इस नियमन का विरोध किया है। उनका तर्क है कि वे केवल टेलीकॉम नेटवर्क का उपयोग करते हैं और टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023 से ओटीटी को पहले ही बाहर रखा गया है।


कनेक्टेड टीवी की संख्या में वृद्धि

2028 तक दोगुने होंगे कनेक्टेड टीवी, लाइसेंसिंग पर विचार
अनुमान है कि 2028 तक भारत में कनेक्टेड टीवी वाले घरों की संख्या 2 करोड़ से बढ़कर 4 करोड़ हो जाएगी। इस बड़े आर्थिक और उपभोक्ता बदलाव को देखते हुए, TRAI का मानना है कि इंटरनेट पर टीवी जैसी शेड्यूल सेवाओं को पूरी तरह अनियंत्रित नहीं छोड़ा जा सकता। लाइसेंसिंग और रेगुलेशन के माध्यम से सभी सेवा प्रदाताओं के लिए समान कारोबारी माहौल तैयार करने की कोशिश की जा रही है।


दर्शकों पर प्रभाव

आम दर्शकों की जेब और कंटेंट पर क्या होगा असर?
यदि इंटरनेट टीवी को केबल और DTH की तरह रेगुलेट किया जाता है, तो दर्शकों के अनुभव में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा। नियमों के तहत आने से प्लेटफार्मों पर अश्लील, भ्रामक विज्ञापनों और आपत्तिजनक सामग्री पर सख्त रोक लगेगी। हालांकि, इसका सबसे बड़ा प्रभाव दर्शकों की जेब पर पड़ सकता है। लाइसेंस फीस और अनुपालन लागत बढ़ने के कारण कंपनियां फ्री चैनल दिखाने के बजाय यूजर्स से मासिक शुल्क या सब्सक्रिप्शन वसूलना शुरू कर सकती हैं, जिससे इंटरनेट पर मुफ्त टीवी का युग समाप्त हो सकता है।