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US सेना का ईरान के तेल टैंकरों पर हमला, बढ़ते सैन्य तनाव का संकेत

US सेना ने हाल ही में ईरान के तीन तेल टैंकरों पर हमला किया, जो कि ईरान द्वारा US नेवी के जहाज़ों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने के कुछ घंटों बाद हुआ। यह घटना वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव को दर्शाती है, जिसमें समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति के मुद्दे शामिल हैं। अमेरिकी कमांडर ने स्पष्ट किया कि उनकी सेना अपनी सुरक्षा के लिए कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाएगी। इस हमले के पीछे एक अरबों डॉलर का गुप्त नेटवर्क भी है, जो IRGC को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
 

ईरान के तेल टैंकरों पर अमेरिकी कार्रवाई

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, शनिवार को US सेना ने ईरान के तीन तेल ले जाने वाले जहाज़ों पर हमला किया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब ईरान ने US नेवी के दो जहाज़ों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। अमेरिकी युद्धपोत इन मिसाइलों से बचने में सफल रहे, और इस हमले में किसी अमेरिकी सैनिक के घायल होने की सूचना नहीं है। यह घटना वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव को दर्शाती है, जिसमें समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति प्रमुख विवाद के मुद्दे बन गए हैं। इन घटनाओं ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है, जो विश्व के महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों में से एक है, जहाँ से वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है।


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ये तीनों टैंकर एक अरबों डॉलर के गुप्त नेटवर्क का हिस्सा थे, जो IRGC और उसके सहयोगी गुटों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि अमेरिकी सेना अपनी सुरक्षा को लेकर कोई संकोच नहीं करेगी और आवश्यकता पड़ने पर ईरान के 'सामने आ चुके' तेल बेड़े को नष्ट कर सकती है। कूपर ने स्पष्ट किया कि IRGC को यह संदेश स्पष्ट होना चाहिए: यदि आप हमारे जहाज़ों पर हमला करते हैं, तो हम आपके तीन जहाज़ों को नष्ट करके आपको और अधिक आर्थिक बोझ डालेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि हम अमेरिकी सेना की रक्षा में पीछे नहीं हटेंगे और आवश्यकता पड़ने पर ईरान के सीमित और असुरक्षित तेल बेड़े को नष्ट कर देंगे।