अंबेडकर के नाम पर राजनीतिक होड़: नेताओं की बयानबाजी और नई योजनाएं
अमित शाह का विवादास्पद बयान
हाल ही में, दिसंबर 2023 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में एक बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था, 'अंबेडकर का नाम लेना अब एक फैशन बन गया है... अगर भगवान का नाम लेते तो स्वर्ग मिल जाता।' इस टिप्पणी ने विवाद को जन्म दिया। कुछ लोगों ने इसे अंबेडकर का अपमान माना, जबकि अन्य ने इसे विपक्ष पर तंज के रूप में देखा, यह कहते हुए कि वे केवल राजनीतिक लाभ के लिए अंबेडकर का नाम लेते हैं। बाद में, अमित शाह ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के खिलाफ कुछ नहीं कहा और उनके शब्दों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया।
अंबेडकर का राजनीतिक महत्व
अमित शाह के बयान ने यह स्वीकार किया कि अंबेडकर का नाम अब अधिक बार लिया जाने लगा है। कांशीराम ने उनके नाम पर दलितों के उत्थान के लिए एक आंदोलन शुरू किया था, जो राजनीतिक और सामाजिक दोनों था। आम आदमी पार्टी और भाजपा जैसी मुख्यधारा की पार्टियों ने अंबेडकर के नाम का उपयोग किया है। अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री कार्यालय में महात्मा गांधी की तस्वीर हटाकर अंबेडकर की तस्वीर लगाई, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंबेडकर के नाम पर पंचतीर्थ का निर्माण किया।
नेताओं की अंबेडकर के प्रति श्रद्धांजलि
हाल के वर्षों में, नेताओं ने अंबेडकर का गुणगान करने के लिए प्रतिस्पर्धा की है। टेलीविजन चैनलों और भाषणों में सबसे अधिक बोला जाने वाला वाक्य रहा है, 'बाबा साहेब के दिए संविधान में...'। प्रधानमंत्री मोदी के पंचतीर्थ के निर्माण के बाद, उनके पार्टी के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर में अंबेडकर धाम का निर्माण करने की घोषणा की। उन्होंने इसे अपने संकल्प के रूप में प्रस्तुत किया।
योगी आदित्यनाथ का नया ऐलान
ज्योतिरादित्य सिंधिया के बयान के बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक नया ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि पूरे प्रदेश में अंबेडकर की मूर्तियों के ऊपर विशाल छाता लगाया जाएगा। यह कदम अंबेडकर की मूर्तियों को चिड़िया के बीट और मौसम से बचाने के लिए उठाया जा रहा है। यह ध्यान देने योग्य है कि देश में महात्मा गांधी, नेहरू या अन्य महापुरुषों की मूर्तियों के लिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
अंबेडकर की मूर्तियों का सम्मान
अंबेडकर की मूर्तियों को पूजा जाने लगा है, और अब यह देखना है कि भाजपा कब मंदिरों में उनकी मूर्तियों को स्थापित करने का निर्णय लेगी।