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अखिलेश यादव का नया रणनीतिक दांव: भाजपा के सहयोगियों को सीटों का बंटवारा

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा के सहयोगी दलों को सीटों के बंटवारे पर सवाल उठाते हुए एक नई रणनीति अपनाई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट में दावा किया है कि भाजपा पिछड़ा और दलित वोट बैंक को सुरक्षित रखने के लिए उदारता से सीटें बांट रही है। जानें, क्या यह दांव भाजपा के गठबंधन में दरार डाल सकेगा या नहीं।
 

अखिलेश यादव की नई रणनीति


समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों के लिए अपने पीडीए फॉर्मूले को सफल बनाने के लिए एक नई रणनीति अपनाई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा की है, जिसमें उन्होंने भारतीय जनता पार्टी द्वारा सहयोगी दलों को दी जाने वाली सीटों का जिक्र किया है। उनके अनुसार, जयंत चौधरी की रालोद को 73, ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को 39, संजय निषाद की निषाद पार्टी को 31 और अनुप्रिया पटेल की अपना दल को 19 सीटें मिलेंगी।


अखिलेश का कहना है कि भाजपा पिछड़ा और दलित वोट बैंक को सुरक्षित रखने के लिए इतनी सीटें बांट रही है। उनका यह भी मानना है कि यदि ये पार्टियां इतनी सीटों की मांग करें और भाजपा उन्हें न दे, तो गठबंधन में दरार आ सकती है। हालांकि, यह तर्क कमजोर प्रतीत होता है क्योंकि कोई भी यह नहीं मान सकता कि भाजपा 162 सीटें अपने सहयोगियों को देगी और खुद 241 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि उसके पास वर्तमान में 255 विधायक हैं।


अखिलेश यादव की यह रणनीति, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया है, यह दर्शाती है कि वे एनडीए में बिखराव लाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन क्या यह प्रयास सफल होगा, यह देखना दिलचस्प होगा।