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अखिलेश यादव के आरोपों पर राम मंदिर ट्रस्ट का तीखा जवाब

उत्तर प्रदेश की राजनीति में अयोध्या और राम मंदिर को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर ट्रस्ट पर आरोप लगाया है कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे की करोड़ों रुपये की राशि गायब हो गई है। इस पर ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेंद्र दास ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, आरोपों को निराधार बताते हुए। उन्होंने 1994 के घटनाक्रम को भी याद किया, जब सपा की सरकार ने उन्हें नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया था। जानें इस सियासी हलचल के पीछे की पूरी कहानी।
 

अयोध्या में सियासी हलचल

अयोध्या: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर अयोध्या और राम मंदिर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया पर एक संवेदनशील पोस्ट साझा करते हुए राम मंदिर ट्रस्ट पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या में स्थित भव्य 'राम मंदिर' में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे की करोड़ों रुपये की राशि गायब हो गई है। इस सनसनीखेज दावे के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेंद्र दास ने तुरंत इन आरोपों को निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया।


अखिलेश यादव का सोशल मीडिया पर हमला

इस घटना की शुरुआत तब हुई जब अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर कई तीखे सवाल उठाए। उन्होंने लिखा, "यह एक चिंताजनक समाचार है कि राम मंदिर के चढ़ावे की करोड़ों की रकम गायब पाई गई है। यह ट्रस्ट के लिए शर्मनाक है, क्योंकि कोई भी इस पर सफाई देने के लिए सामने नहीं आ रहा है।" उन्होंने न्यायालय से इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने की अपील की, यह कहते हुए कि यह समस्त सनातनी समाज की आस्था से जुड़ा है।


महंत दिनेंद्र दास का जवाब

महंत दिनेंद्र दास ने अखिलेश यादव के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट में वित्तीय हेराफेरी का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने स्पष्ट किया, "हमारे पास भक्तों द्वारा चढ़ाए गए हर पैसे का पारदर्शी और लिखित हिसाब है।" उन्होंने यह भी कहा कि देश और अयोध्या में सद्भावना का माहौल है, जिसे कुछ लोग राजनीतिक लाभ के लिए बिगाड़ना चाहते हैं।


1994 का काला इतिहास

महंत दिनेंद्र दास ने 1994 के घटनाक्रम को याद करते हुए कहा कि उस समय सपा की सरकार ने उन्हें मारने का प्रयास किया था। उन्होंने कहा, "हमने केवल 'राम' नाम का जाप किया था और हमारा विश्वास अडिग था।" उन्होंने यह भी कहा कि भगवान राम सब देख रहे हैं और राजनीति करने वाले अपनी रोटियां सेंकने के लिए कुछ भी कह सकते हैं।