अखिलेश यादव ने पीएम मोदी की अपील पर कसा तंज, कहा संकट चुनाव के बाद याद आया
अखिलेश यादव का पीएम मोदी पर हमला
अखिलेश यादव का बयान: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में तेलंगाना के सिकंदराबाद में एक सभा में लोगों से विदेशी मुद्रा की बचत करने की अपील की। उन्होंने सोने की खरीदारी और पेट्रोल-डीजल के उपयोग को कम करने की सलाह दी। इस पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने सरकार पर तीखा हमला किया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव खत्म होते ही संकट की याद आ गई है।
अखिलेश यादव ने सोमवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, 'चुनाव ख़त्म होते ही, संकट याद आ गया! असल में देश के लिए संकट केवल एक है और उसका नाम है: भाजपा। इतनी सारी पाबंदियों के बावजूद 'पंच ट्रिलियन डॉलर की जुमलाई अर्थव्यवस्था' कैसे बनेगी? ऐसा लगता है कि भाजपा सरकार पूरी तरह से नियंत्रण खो चुकी है। डॉलर की कीमत आसमान छू रही है और रुपये की स्थिति बेहद खराब हो गई है। जनता तो पहले ही 1.5 लाख तोले का सोना नहीं खरीद पा रही है। भाजपा के लोग अपनी काली कमाई को स्वर्ण में बदलने में लगे हैं।'
पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा, 'चुनाव के बाद सारी पाबंदियाँ क्यों याद आईं? भाजपा के नेताओं ने चुनाव के दौरान हजारों चार्टर उड़ानें भरीं, क्या वे पानी से उड़ रही थीं? क्या वे होटलों में नहीं ठहरे थे? भाजपा के लोग चुनाव में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से प्रचार क्यों नहीं कर रहे थे? क्या ये पाबंदियाँ केवल जनता के लिए हैं? इस तरह की अपील से व्यापार में मंदी और महंगाई का डर बढ़ेगा। सरकार का काम आपातकालीन स्थितियों से उबारना है, न कि भय फैलाना।'
उन्होंने कहा, 'अगर सरकार चलाने में असमर्थ हैं तो भाजपा अपनी नाकामी स्वीकार करे, देश को बर्बाद न करे। इन हालातों की असली वजह विदेश नीति में भाजपा का गुट निरपेक्षता से हटकर कुछ खास गुटों के पीछे चलना है। इसका खामियाजा जनता को महंगाई, बेरोजगारी और मंदी के रूप में भुगतना पड़ रहा है। हर वर्ग इस संकट का सामना कर रहा है। सच तो यह है कि भाजपा विदेश नीति और घरेलू नीति दोनों में विफल हो गई है। यह अपील उनकी असफलता की स्वीकृति है।'
अखिलेश ने कहा, 'भाजपा ने चुनावी धांधलियों से राजनीति को दूषित कर दिया है; नफरत फैलाकर समाज के सौहार्द को नष्ट कर दिया है; अपने आचरण से संस्कृति को कलुषित कर दिया है; साधु-संतों पर आरोप लगाकर धर्म को भी नहीं छोड़ा है और अब अर्थव्यवस्था का रोना रो रहे हैं। इस अपील के बाद जनता में जो आक्रोश है, उसका प्रबंधन भाजपा चुनावी जुगाड़ से नहीं कर पाएगी। अब भाजपा का जाना तय है। देश कह रहा है, आज का, नहीं चाहिए भाजपा!'