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अखिलेश यादव ने बुद्ध पूर्णिमा पर योगी के बयान पर किया पलटवार

बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'गिरगिट' बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह जनता का ध्यान महत्वपूर्ण मुद्दों से भटकाने का प्रयास कर रही है। इस दौरान, उन्होंने बौद्ध स्थलों के विकास की आवश्यकता और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। कार्यक्रम में बौद्ध भिक्षुओं की बड़ी संख्या में भागीदारी ने इसे और भी महत्वपूर्ण बना दिया।
 

बुद्ध पूर्णिमा पर सपा प्रमुख का बयान

बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर समाजवादी पार्टी (सपा) के कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में, सपा के नेता अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘गिरगिट’ वाले बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार अपने रुख को बदलने में माहिर है और जनता का ध्यान महत्वपूर्ण मुद्दों से भटकाने का प्रयास कर रही है। 


अखिलेश यादव ने कहा कि वर्तमान समय में कई चुनौतियाँ हैं और समाज को एकजुट होकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है। उन्होंने बौद्ध आस्था से जुड़े प्रमुख स्थलों जैसे लुंबनी, सारनाथ और कुशीनगर के विकास की आवश्यकता पर जोर दिया, यह कहते हुए कि इन स्थलों को वैश्विक पहचान दिलाना आवश्यक है। 


मुख्यमंत्री के ‘गिरगिट’ वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, उन्होंने कहा कि वास्तव में सत्ता पक्ष ही परिस्थितियों के अनुसार अपने बयान बदलता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ‘नारी वंदन’ जैसे मुद्दों का उपयोग केवल नारेबाजी के लिए किया जा रहा है, जिससे जनता का ध्यान भटकाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश की जनता सब कुछ समझ चुकी है और बदलाव की चाहत रखती है। 


महिला आरक्षण के मुद्दे पर, उन्होंने कहा कि यह सभी दलों की सहमति से पारित हुआ था, लेकिन भाजपा इसे राजनीतिक लाभ के लिए भुना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे को उछालकर अन्य महत्वपूर्ण समस्याओं से ध्यान हटाने का प्रयास कर रही है। सपा प्रमुख ने परिसीमन और संशोधन से संबंधित मामलों पर भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। 


कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर, उन्होंने ‘बुलडोजर नीति’ की आलोचना की और हरदोई तथा वाराणसी की घटनाओं की निष्पक्ष जांच की मांग की। इसके अलावा, उन्होंने स्मार्ट मीटर योजना, गेहूं खरीद में देरी, श्रम कानूनों में बदलाव और अयोध्या मास्टर प्लान में बार-बार संशोधन जैसे मुद्दों को उठाते हुए सरकार को कठघरे में खड़ा किया। 


उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नीतियों के माध्यम से कुछ चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचा रही है। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षुओं ने भाग लिया। “बुद्धं शरणं गच्छामि” के उद्घोष से पूरा परिसर गूंज उठा और भिक्षुओं ने बौद्ध धर्म के उपदेशों का पाठ किया। वक्ताओं ने सामाजिक न्याय, महिलाओं के सशक्तिकरण और पिछड़े वर्गों के अधिकारों पर भी अपने विचार साझा किए।