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अखिलेश यादव ने महिलाओं के आरक्षण की मांग को फिर से उठाया

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार से महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग की है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को चुनौती दी है कि वह इसे 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में लागू करने की समयसीमा बताए। यादव का कहना है कि यदि सरकार इस मुद्दे पर चुप्पी साधेगी, तो उनकी पार्टी इसे एक बड़े जन आंदोलन में बदल देगी। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है और इसके राजनीतिक प्रभाव क्या हो सकते हैं।
 

महिलाओं के आरक्षण की मांग

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार से एक बार फिर अपील की है कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में तुरंत लागू किया जाए। उन्होंने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को चुनौती दी कि या तो वह इसे लागू करने की समयसीमा बताए या फिर यह स्वीकार करे कि वह महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ है।



यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि उनका ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठजोड़ महिलाओं के आरक्षण के पक्ष में है और इसे जल्द लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार इस मुद्दे पर चुप्पी साधेगी, तो समाजवादी पार्टी इसे एक बड़े जन आंदोलन में बदल देगी और हर सप्ताह विभिन्न स्थानों पर इसे उठाएगी।


उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो साझा किया, जिसमें मोदी ने समाजवादी पार्टी पर संसद में महिला आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगाया था। यह मांग ऐसे समय में उठी है जब हाल ही में संसद में महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका।


लोकसभा में इसे दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला। 298 सांसदों ने समर्थन किया, जबकि 230 ने विरोध किया, जबकि पारित होने के लिए 352 वोट आवश्यक थे। विश्लेषकों का मानना है कि समाजवादी पार्टी 2027 चुनाव से पहले महिलाओं और पीडीए वोट बैंक को साधने की रणनीति पर काम कर रही है।