अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ पर साधा निशाना, 2024 चुनाव की हार को बताया कारण
अखिलेश यादव का हमला
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए लिखा कि, '5 सेकंड की यह स्वीकारोक्ति' पीडीए को धमकी देने वाले भाजपाइयों को 5 दशक, 5 सदियों और 5 जन्मों तक सिर उठाकर देखने लायक नहीं छोड़ेगी।
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने पारंपरिक धमकी भरे अंदाज में यह स्वीकार किया है कि उनके शासन में पीडीए का उत्पीड़न जारी रहेगा। इसका मतलब है कि भाजपा सरकार का अत्याचार और अन्याय 'पीड़ित, दुखी, अपमानित' और 'पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक, आधी आबादी और आदिवासी' के खिलाफ और बढ़ेगा।
मुख्यमंत्री जी ने अपने चिरपरिचित धमकी भरे अंदाज़ में ख़ुद स्वीकार कर लिया है कि उनके राज में पीडीए का उत्पीड़न रुकनेवाला नहीं है। मतलब ‘पीड़ित, दुखी, अपमानित’ व ‘पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक-आधी आबादी-आदिवासी’ के साथ भाजपा सरकार का अत्याचार और अन्याय और बढ़नेवाला है।
पीडीए को धमकी देती ‘5 सेकंड की ये स्वीकारोक्ति’ पीडीए का दमन करनेवाले भाजपाइयों को 5 दशक क्या 5 सदियों और 5 जन्मों तक सिर उठाकर आँख मिलाने लायक नहीं छोड़ेगी।
जब माननीय को सोते-जागते हर समय ‘पीडीए-ही-पीडीए’ दिखता है तो हमारी सलाह तो ये है कि वो क्यों ना 108 मनकों पर ‘पीडीए’ लिखवाकर, उसकी माला बनाकर ‘पीडीए का जाप’ करें, इससे कम-से-कम उनके कुछ पाप तो कम होंगे।
सच तो ये है कि 2024 के चुनाव की हार की वजह से संतुलन बिगड़ गया है, इसीलिए ऐसे असंतुलित बयान आ रहे हैं।
इनके पास क्या अपनी बात करने के लिए कोई मुद्दा नहीं है।
उपलब्धि के स्तर पर भाजपा दिवालिया है।
जनता ‘चढ़ावा चोरों’ की बात सुनने के मूड में नहीं है!
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) October 7, 2026
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि जब मुख्यमंत्री को हर समय 'पीडीए' ही नजर आता है, तो उन्हें सलाह दी कि वे 108 मनकों पर 'पीडीए' लिखकर उसकी माला बनाकर 'पीडीए का जाप' करें, ताकि उनके कुछ पाप कम हो सकें।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 2024 के चुनाव में हार के कारण मुख्यमंत्री का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है, जिससे ऐसे असंतुलित बयान सामने आ रहे हैं। भाजपा के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है और उनकी उपलब्धियों के स्तर पर पार्टी दिवालिया हो चुकी है। जनता अब 'चढ़ावा चोरों' की बात सुनने के लिए तैयार नहीं है।