अजरबैजान और भारत के बीच नए रिश्तों की शुरुआत
नई दिल्ली में कूटनीतिक वार्ता
नई दिल्ली: भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान, मुस्लिम देश अजरबैजान ने पाकिस्तान का समर्थन किया था। लेकिन अब, कूटनीतिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। अजरबैजान अब भारत के साथ अपने संबंधों को 'नई शुरुआत' देने की कोशिश कर रहा है। शुक्रवार को अजरबैजान की राजधानी बाकू में दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय कूटनीतिक वार्ता हुई, जिसे द्विपक्षीय संबंधों को पुनः स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भारत के विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने बाकू पहुंचकर अधिकारियों के साथ 'विदेश कार्यालय परामर्श' के छठे दौर का नेतृत्व किया। यह दोनों देशों के बीच पिछले कई वर्षों में हुई पहली व्यापक बातचीत है, जिसका मुख्य उद्देश्य खोए हुए राजनीतिक विश्वास को पुनर्स्थापित करना और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाना है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अजरबैजान की भूमिका
अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक गंभीर आतंकी हमले के बाद, भारत ने 7 से 10 मई 2025 के बीच 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया। इस सैन्य अभियान के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थित 9 बड़े आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया। इस दौरान अजरबैजान और तुर्की ने पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया। अजरबैजान के विदेश मंत्रालय ने भारत की कार्रवाई की निंदा करते हुए एक बयान जारी किया और पाकिस्तान के प्रति एकजुटता दिखाते हुए 'संयम' बरतने की अपील की। इस पर भारत में तीखी प्रतिक्रिया हुई, जिसके चलते सोशल मीडिया पर 'बॉयकॉट तुर्की-अजरबैजान' अभियान चलने लगा, जिससे वहां जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आई। इसके अलावा, भारत ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में अजरबैजान की पूर्ण सदस्यता का विरोध किया, जिससे दोनों देशों के कूटनीतिक संबंध पूरी तरह से ठंडे पड़ गए थे।
नई शुरुआत की दिशा में कदम
तल्खियों के लंबे दौर के बाद, अजरबैजान के विदेश मंत्री जेहुन बायरामोव और भारतीय प्रतिनिधिमंडल के बीच हाल की बैठक में द्विपक्षीय संबंधों की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर गहन चर्चा की गई। भारत की ओर से जारी बयान में व्यापार, तकनीक, पर्यटन, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा और संस्कृति के साथ-साथ सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ कड़ाई से लड़ने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जोर दिया गया है। वहीं, अजरबैजान ने अपने बयान में व्यावहारिक सहयोग पर अधिक ध्यान केंद्रित किया है, जिसमें अर्थव्यवस्था, व्यापार, ऊर्जा, पर्यटन और शिक्षा के क्षेत्रों में सहयोग की बात की गई है।
अजरबैजान की सोच और भारत के विरोध के पीछे की वजह
अजरबैजान की नाराजगी और पाकिस्तान के समर्थन के पीछे एक प्रमुख कारण नागोर्नो-काराबाख संघर्ष था। अजरबैजान का मानना था कि इस संघर्ष के दौरान भारत ने उसके विरोधी देश आर्मेनिया का समर्थन किया था। हालांकि, हालिया बैठक के बाद अजरबैजान ने मतभेदों को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया है कि जिन मामलों पर दोनों देशों के विचार भिन्न हैं, उन पर खुलकर चर्चा की गई है। इसके साथ ही, अजरबैजान ने आपसी दूरियों को मिटाने के लिए निरंतर बातचीत जारी रखने के महत्व पर भी जोर दिया है।