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अजरबैजान की स्थिति: इजराइल द्वारा अर्मेनियन नरसंहार की मान्यता से हड़कंप

अजरबैजान की स्थिति में अचानक बदलाव आया है, जब इजराइल ने 1915 के अर्मेनियन नरसंहार को मान्यता दी। यह कदम अजरबैजान और तुर्की के लिए एक बड़ा झटका है, जिससे उनकी कूटनीतिक स्थिति कमजोर हुई है। भारत ने इस स्थिति का लाभ उठाते हुए आर्मेनिया के साथ अपने संबंधों को मजबूत किया है। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की कहानी और इसके वैश्विक प्रभाव।
 

अजरबैजान की नई चुनौतियाँ

कल तक, अजरबैजान भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने में लगा हुआ था, लेकिन अब उसकी स्थिति उस चूहे जैसी हो गई है जो खुद के बनाए बिल में फंस गया है। आज, अजरबैजान को दो मोर्चों पर एक साथ बड़ा झटका लगा है, जिससे बाकू से इस्लामाबाद तक मातम का माहौल है। भारत ने एक ऐसी कमजोर नस को छू लिया है, जिसे पिछले एक सदी में किसी ने नहीं छुआ था। इजराइल की संसद और सरकार ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए 1915 के अर्मेनियन नरसंहार को आधिकारिक रूप से मान्यता दी है। यह एक महत्वपूर्ण घटना है, क्योंकि इजराइल पिछले कई दशकों से इस मुद्दे पर चुप था, जबकि अजरबैजान उसका प्रमुख व्यापारिक साझेदार था.


इजराइल की नई रणनीति

इजराइल को अपनी ऊर्जा जरूरतों का 40% तेल अजरबैजान से मिलता था, और इसके बदले में इजराइल उसे हथियार प्रदान करता था। लेकिन जब तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगान ने इजराइल के खिलाफ हमास का समर्थन किया और अजरबैजान ने पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत को चुनौती दी, तो इजराइल ने अपनी रणनीति में बदलाव किया। विदेश मंत्री गिदोन सार ने कहा कि अब इतिहास की सच्चाई को स्वीकार करने में और देरी नहीं की जा सकती। 15 लाख अर्मेनियाई लोगों की हत्या को मान्यता देकर इजराइल ने अजरबैजान और तुर्की के उस अहंकार को तोड़ दिया है, जिसे वे दुनिया से छिपाते रहे हैं.


इतिहास की काली छाया

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, ऑटुमन साम्राज्य ने सुनियोजित तरीके से अर्मेनियाई ईसाइयों का कत्लेआम किया था। 24 अप्रैल 1915 को शुरू हुए इस नरसंहार में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सीरिया के रेगिस्तानों में भूखा-प्यासा छोड़ दिया गया। तुर्की और अजरबैजान ने इस सच्चाई को छिपाने की कोशिश की है, लेकिन अब इजराइल, अमेरिका, रूस और जर्मनी जैसे 32 देशों ने इसे जेनोसाइड मान लिया है। इजराइल का यह निर्णय अजरबैजान के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका है, क्योंकि अब वह नैतिक रूप से अकेला पड़ गया है.


भारत की भूमिका

इस वैश्विक शतरंज में असली खिलाड़ी भारत है। भारत ने अजरबैजान को उसकी सही जगह दिखाने के लिए साइलेंट वॉरफेयर का रास्ता अपनाया है। 2020 के युद्ध में, जब अजरबैजान ने तुर्की के ड्रोन की मदद से आर्मेनिया को नुकसान पहुँचाया, तब भारत ने एक महत्वपूर्ण रणनीतिक निर्णय लिया और अब भारत आर्मेनिया का सबसे बड़ा और विश्वसनीय हथियार सप्लायर बन चुका है.