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अदीना मस्जिद विवाद: धार्मिक तनाव और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में अदीना मस्जिद एक बार फिर विवाद का केंद्र बन गई है। हिंदू संगठनों ने मस्जिद के पास शिवलिंग स्थापित करने की योजना बनाई है, जिससे तनाव बढ़ गया है। भाजपा सांसद ने इस मुद्दे को संसद में उठाया है, जबकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के रिकॉर्ड में इसे संरक्षित स्मारक के रूप में दर्ज किया गया है। स्थानीय मुस्लिम समुदाय का कहना है कि इस विवाद का समाधान अदालत के माध्यम से होना चाहिए। जानें इस संवेदनशील मुद्दे के सभी पहलुओं के बारे में।
 

नई दिल्ली में अदीना मस्जिद का विवाद


नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में स्थित अदीना मस्जिद एक बार फिर धार्मिक और ऐतिहासिक विवाद का केंद्र बन गई है। सावन माह की शुरुआत के साथ, कुछ हिंदू संगठनों ने मस्जिद के निकट भगवान आदिनाथ के प्रतीक स्वरूप शिवलिंग स्थापित करने और रुद्राभिषेक करने का ऐलान किया, जिससे क्षेत्र में तनाव उत्पन्न हो गया। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और पूरे इलाके की निगरानी ड्रोन के माध्यम से की जा रही है।


हिंदू संगठनों का कहना है कि वर्तमान अदीना मस्जिद का निर्माण एक प्राचीन आदिनाथ मंदिर को ध्वस्त करके किया गया था। उनका दावा है कि मस्जिद की दीवारों और संरचना में हिंदू देवी-देवताओं की आकृतियाँ और स्थापत्य शैली मौजूद हैं, जो उनके दावे को मजबूत करती हैं। इसी आधार पर वे इस स्थल को आदिनाथ मंदिर घोषित करने और पूजा की अनुमति देने की मांग कर रहे हैं।


भाजपा सांसद का बयान

भाजपा के राज्यसभा सांसद ने क्या कहा?


इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से भी उठाया गया है। भाजपा के राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य ने संसद में कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अभिलेख और संरचना के अवशेष इस स्थान के मंदिर होने का संकेत देते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी मांग कानून के दायरे में रहकर सरकारी मान्यता प्राप्त करने की है।


पुरातत्व सर्वेक्षण के रिकॉर्ड

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के रिकॉर्ड में क्या है?


दूसरी ओर, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के रिकॉर्ड में यह स्थल अदीना मस्जिद के नाम से संरक्षित स्मारक के रूप में दर्ज है। एएसआई के नियमों के अनुसार, संरक्षित स्मारकों के भीतर नई धार्मिक गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस मामले को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट में जनहित याचिका लंबित है और अदालत ने एएसआई से पुरातात्विक रिपोर्ट मांगी है। अभी तक किसी भी दावे पर अदालत का अंतिम निर्णय नहीं आया है।


इतिहास और निर्माण

कब हुआ था इसका निर्माण?


इतिहास के अनुसार, अदीना मस्जिद का निर्माण 14वीं सदी में बंगाल सल्तनत के सुल्तान सिकंदर शाह ने कराया था। इसे कभी भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक माना जाता था। बाद में भूकंप से यह क्षतिग्रस्त हो गई और नियमित उपयोग बंद हो गया। कुछ इतिहासकारों और हिंदू संगठनों का मानना है कि इसके निर्माण में पहले से मौजूद किसी हिंदू या अन्य धार्मिक संरचना के अवशेषों का उपयोग किया गया था। हालांकि, इस दावे पर इतिहासकारों में एकमत राय नहीं है।


स्थानीय मुस्लिम समुदाय का कहना है कि इस संवेदनशील विवाद का समाधान केवल अदालत और कानून के माध्यम से होना चाहिए। प्रशासन ने भी लोगों से अफवाहों से बचने और शांति बनाए रखने की अपील की है। फिलहाल, यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में है और अदीना मस्जिद को लेकर किए जा रहे दावों पर कोई अंतिम कानूनी निर्णय नहीं आया है। इसलिए इस विषय से जुड़े सभी दावों को अदालत और आधिकारिक जांच के निष्कर्ष आने तक अप्रमाणित माना जाएगा।