अन्ना हजारे ने राघव चड्ढा के पार्टी परिवर्तन की आलोचना की
राजनीतिक दल बदलने पर अन्ना हजारे की टिप्पणी
नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने शनिवार को राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा द्वारा आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के निर्णय की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए राजनीतिक दलों का परिवर्तन उचित नहीं है और यह संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है। हजारे ने यह भी कहा कि चुने गए प्रतिनिधियों को संविधान की भावना के अनुसार कार्य करना चाहिए और निजी लाभ के लिए निर्णय लेने से बचना चाहिए। उन्होंने लोकतांत्रिक नैतिकता को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
हजारे ने कहा कि एक पार्टी को छोड़कर दूसरी में जाना सही नहीं है। अपने स्वार्थ के लिए राजनीतिक दल बदलना अनुचित है। हमारे संविधान में इस विषय का कोई उल्लेख नहीं है। संविधान हमारे देश का सर्वोच्च कानून है। हजारे 2011 में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान आम आदमी पार्टी के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं, लेकिन बाद में मुख्यधारा की राजनीति से दूर हो गए। उनकी यह टिप्पणी उस समय आई है जब राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। शुक्रवार को राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने आम आदमी पार्टी से अलग होने की घोषणा की और भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा में शामिल होने के बाद, पार्टी प्रमुख नितिन नबीन ने इस निर्णय का स्वागत किया। चड्ढा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि उन्होंने और उनके छह अन्य राज्यसभा सांसदों ने नियमों के अनुसार सदन के सभापति को पार्टी छोड़ने की सूचना दे दी है। आम आदमी पार्टी भी इस मामले में राज्यसभा सभापति को पत्र भेजने की तैयारी कर रही है। यह विभाजन पिछले कुछ हफ्तों से चल रहा था और अब औपचारिक रूप ले चुका है।