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अमरनाथ यात्रा के लिए जम्मू-कश्मीर में तैयारियां पूरी, श्रद्धालुओं का उत्साह

अमरनाथ यात्रा के लिए जम्मू-कश्मीर में सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। पंजीकरण और आरएफआईडी कार्ड जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिससे श्रद्धालुओं में उत्साह बढ़ गया है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाएंगे। यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगी। जानें इस यात्रा के बारे में और क्या खास है।
 

अमरनाथ यात्रा की तैयारियों का आगाज़

नई दिल्ली : जम्मू-कश्मीर में श्री अमरनाथ यात्रा के लिए सभी आवश्यक तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। बुधवार को जम्मू में तीर्थयात्रियों के लिए पंजीकरण और आरएफआईडी कार्ड जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा शुक्रवार को पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।


जम्मू में पंजीकरण कराने और आरएफआईडी कार्ड लेने के लिए बड़ी संख्या में तीर्थयात्री कतार में खड़े दिखाई दिए। अमरनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया। एक तीर्थयात्री ने कहा, “मैं बहुत उत्साहित हूं। मुझे उम्मीद नहीं थी कि मुझे पहले बैच में मौका मिलेगा। मैं काफी समय से कोशिश कर रहा था।” जम्मू में श्रद्धालुओं ने यात्रा की व्यवस्थाओं की सराहना की। एक अन्य तीर्थयात्री ने कहा, “मैं पिछली बार भी यात्रा पर गया था। इस बार भी जा रहा हूं। व्यवस्थाएं बहुत अच्छी हैं।”


तीसरे जत्थे में शामिल होने वाले एक तीर्थयात्री ने कहा, “मैं तीसरी बार यात्रा पर जा रहा हूं। सारी सुविधाएं अच्छी हैं। हालांकि, रजिस्ट्रेशन और आरएफआईडी कार्ड के लिए थोड़ी परेशानी होती है। इसके बाद सुकून मिलता है और विश्वास होता है कि बाबा के दर्शन कर पाएंगे।”


अमरनाथ यात्रा के पहले जत्थे के रवाना होने से पहले श्रीनगर में यात्री ट्रांजिट कैंप में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। एक तीर्थयात्री ने कहा, “मैं बहुत खुश हूं। मैं पहली बार जा रहा हूं।” एक महिला तीर्थयात्री ने कहा, “मैं बाबा भोलेनाथ में आस्था लेकर आई हूं। उन्होंने हमें बुलाया है और वही दर्शन कराएंगे।”


महिला ने बताया कि वह भी पहली बार अमरनाथ यात्रा पर आई हैं और प्रशासन की व्यवस्थाओं की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “हम बुधवार रात को ट्रांजिट कैंप पहुंचे थे। यहां व्यवस्थाएं अच्छी हैं। किसी भी चीज की कमी नहीं है।”


ज्ञात हो कि अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगी। पहलगाम मार्ग से मंदिर तक पहुंचने में लगभग चार दिन लगते हैं, जबकि बालटाल से जाने वाला रास्ता छोटा है, जहां दर्शन के बाद उसी दिन वापस लौटना संभव है।