अमित शाह ने महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में दी सफाई, कहा- विरोध केवल दिखावा है
महिला आरक्षण बिल पर अमित शाह का बयान
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर अपनी बात रखते हुए कहा कि सभी दल इसके समर्थन में हैं, लेकिन इंडी अलायंस के सदस्यों ने इसे लेकर कई शर्तें रखकर विरोध किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विरोध केवल महिला आरक्षण के खिलाफ है और उनकी जिम्मेदारी है कि वे सदन को इस बारे में जानकारी दें।
शाह ने कहा कि लोकसभा में 543 सीटें हैं, जिनमें से कुछ पर मतदाताओं की संख्या 39 लाख तक है, जबकि कुछ पर केवल 7 लाख। इस समस्या के समाधान के लिए ही महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक लाए गए हैं। उन्होंने बताया कि संविधान में समय-समय पर सुधार की आवश्यकता है और जो लोग परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, वे एससी और एसटी सीटों का भी विरोध कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है, फिर भी इंडी अलायंस के दल मुस्लिम आरक्षण की मांग कर रहे हैं। शाह ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह ओबीसी समाज के खिलाफ है और उसने हमेशा पिछड़ों के हितों को दबाया है।
अमित शाह ने बताया कि 1950 के दशक में काका कालेलकर आयोग के सुझावों को नजरअंदाज किया गया और मंडल आयोग के सुझावों को भी इंदिरा गांधी के समय में नकारा गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा जातिगत जनगणना का विरोध किया है, लेकिन अब चुनाव हारने के बाद ओबीसी के हितैषी बनने का दिखावा कर रही है।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने एक अति पिछड़े समाज के व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनाया है और वर्तमान में 27 मंत्री ओबीसी समुदाय से हैं। मोदी सरकार ने ओबीसी आयोग को संवैधानिक मान्यता दी है और 16 नई जातियों को ओबीसी श्रेणी में शामिल किया है।
चर्चा के दौरान, शाह ने कहा कि यदि सदन सहमत हो तो वे लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए संशोधन बिल लाने के लिए तैयार हैं। कांग्रेस सांसद के. सी. वेणुगोपाल ने इस पर सवाल उठाया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी इस मुद्दे पर सहमति बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि उन्हें सरकार के आश्वासनों पर भरोसा नहीं है। अमित शाह ने कहा कि महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते में कौन बाधा डाल रहा है और चुनाव में मातृशक्ति हिसाब मांगेगी।
उन्होंने कहा कि जनता ही निर्णय करती है और मोदी सरकार संविधानिक सुधार लेकर आई है। शाह ने बताया कि 1971 से अब तक सीटों की संख्या फ्रीज रही है, जबकि कई सीटों पर मतदाताओं की संख्या 20 लाख से अधिक है।