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अमेरिका-ईरान तनाव: युद्धविराम की कहानी और कूटनीतिक प्रयास

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने एक विनाशकारी हमले की चेतावनी दी। इस बीच, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कूटनीतिक प्रयासों के तहत एक मध्यस्थता प्रस्ताव पेश किया। तेहरान में नागरिकों ने मानव श्रृंखला बनाकर विरोध किया, जबकि व्हाइट हाउस में युद्धविराम की चर्चा चल रही थी। क्या यह तनाव कम होगा? जानें पूरी कहानी में।
 

वॉशिंगटन में तनाव का माहौल

वॉशिंगटन डीसी में शाम के 6:30 बजे थे, और ओवल ऑफिस की खिड़कियों से बाहर की शांति एक संभावित तूफान का संकेत दे रही थी। पूरी दुनिया की नजरें थम गई थीं, और हर किसी की धड़कनें घड़ी की सुइयों के साथ तेज हो रही थीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के सैन्य ढांचे पर एक 'विनाशकारी' हमले की दी गई डेडलाइन खत्म होने में केवल 90 मिनट बचे थे। वॉशिंगटन से लेकर तेहरान तक, हवा में युद्ध की गंध महसूस की जा रही थी। कूटनीति अपने सबसे कमजोर दौर में थी, और अनिश्चितता का भारी दबाव वैश्विक शांति की उम्मीदों को कुचल रहा था।


डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी

उस सुबह, ट्रंप ने अपने 'ट्रुथ सोशल' प्लेटफॉर्म पर 11 शब्दों की एक पोस्ट साझा की, जिसने वैश्विक कूटनीति में हलचल मचा दी: "आज रात एक पूरी सभ्यता मिट जाएगी, जिसे फिर कभी वापस नहीं लाया जा सकेगा।" डेडलाइन रात 8:00 बजे की थी, और ईरान के पुल, पावर प्लांट और जल इंफ्रास्ट्रक्चर इस हमले के लक्ष्य थे। ट्रंप ने पहले ही तेहरान के पास एक रणनीतिक पुल को नष्ट कर इसे आने वाली तबाही की एक 'झलक' बताया था।


तेहरान में नागरिकों का विरोध

जहां वॉशिंगटन में हमले की तैयारी चल रही थी, वहीं तेहरान में हजारों नागरिक, छात्र और श्रमिक शिया परंपरा की शहादत की भावना से प्रेरित होकर अपने देश के पावर प्लांट्स के बाहर इकट्ठा हुए। उन्होंने एक-दूसरे का हाथ थामकर 'मानव श्रृंखला' बनाई, अपने शरीर को ट्रंप की मिसाइलों के खिलाफ ढाल बनाकर खड़ा किया।


पाकिस्तान का कूटनीतिक प्रयास

जब सैन्य समाधान लगभग तय लग रहा था, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कूटनीतिक मोर्चा संभाला। उन्होंने 'X' (ट्विटर) पर एक मध्यस्थता प्रस्ताव पेश किया, जिसमें दो मुख्य मांगें थीं: ट्रंप अपनी डेडलाइन को दो हफ्ते के लिए बढ़ा दें और ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य को तुरंत खोल दे। व्हाइट हाउस के अंदर तीखी बहस चल रही थी, जहां इज़रायल और कुछ सीनेटर हमले के पक्ष में थे, जबकि कुछ सलाहकार समझौते की वकालत कर रहे थे।


सीज़फ़ायर की कोशिशें

इस्लामाबाद में, शरीफ़ लगातार फ़ोन पर बातचीत कर रहे थे। उन्होंने दो हफ़्ते के सीज़फ़ायर का विचार पेश किया, जिसमें ट्रंप, वैंस, रूबियो, विटकॉफ़ और ईरानी नेताओं को टैग किया। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी ने कहा कि राष्ट्रपति को इस प्रस्ताव के बारे में बता दिया गया है, और जल्द ही कोई जवाब आएगा। इससे वॉशिंगटन को रुकने का एक बहाना मिल गया।


व्हाइट हाउस के अंदर की स्थिति

बंद दरवाज़ों के पीछे, ईरान ने पहले ही अपना 10-सूत्रीय प्रस्ताव भेजा था, जिसे शुरू में अस्वीकार कर दिया गया था। ट्रंप ने इसे "एक अहम क़दम" कहा, लेकिन यह भी कहा कि यह "काफ़ी नहीं है।" अमेरिका के अनुसार, इस दस्तावेज़ में कुछ बड़ी माँगें शामिल थीं, लेकिन एक रियायत भी थी जो सबसे महत्वपूर्ण थी: होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाज़ों को गुज़रने देने की सहमति।


घोषणा का समय

शाम 6:32 बजे, ट्रंप ने 'Truth Social' पर एक पोस्ट की, जिसमें उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और फ़ील्ड मार्शल के साथ बातचीत के आधार पर, वह दो हफ्तों के लिए ईरान पर हमले को रोकने पर सहमत हैं। उन्होंने इसे 'दो-तरफ़ा युद्धविराम' कहा।


ईरान का प्रतिक्रिया

ईरान के विदेश मंत्री ने तुरंत जवाब दिया कि अगर हमले रोक दिए जाते हैं, तो उनकी सेना अपनी रक्षात्मक कार्रवाई रोक देगी। ईरान ने अपनी तरफ से जीत का ऐलान किया, यह दावा करते हुए कि अमेरिका ने उनकी शांति योजना मान ली है।


बाजारों की प्रतिक्रिया

बाजारों ने एक अलग कहानी बताई। अमेरिका का कच्चा तेल आधे घंटे में 9% से अधिक गिर गया। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट लगभग $96 प्रति बैरल पर आ गया।


युद्धविराम का कार्यान्वयन

युद्धविराम लागू होने के बाद भी, ईरान से इज़रायल और कई खाड़ी देशों की तरफ मिसाइलें दागी गईं। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि युद्धविराम का आदेश रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के निचले रैंक तक पहुँचने में समय लग सकता है।


इस्लामाबाद वार्ता

शरीफ़ ने बयान दिया कि दोनों पक्षों ने समझदारी दिखाई है और उन्होंने प्रतिनिधिमंडलों को एक निर्णायक समझौते पर बातचीत के लिए पाकिस्तानी राजधानी में बुलाया।


व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया

व्हाइट हाउस ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के शब्द बातचीत के लिए एक व्यावहारिक आधार हैं, और ये बातचीत जारी रहेगी।


राहत की साँस

पूरे ईरान में यह ख़बर फैल गई कि बम बरसाने वाले विमान नहीं आए थे। लोग राहत की साँस ले रहे थे।