×

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव: ईरान की चेतावनी

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव बढ़ता जा रहा है, जिसमें अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर लगातार बमबारी की है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि हमले जारी रहे, तो वह एक बड़े आक्रामक अभियान की शुरुआत करेगा। इस स्थिति ने पूरे मध्य पूर्व में युद्ध का संकट पैदा कर दिया है। जानें इस विवाद की जड़ें और आगे की संभावनाएं।
 

वाशिंगटन में बढ़ते सैन्य टकराव

वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष अब अपने चरम पर पहुँच चुका है। अमेरिकी सेना के United States Central Command (CENTCOM) ने शुक्रवार को लगातार सातवीं रात ईरान के विभिन्न ठिकानों पर बमबारी की। इस कार्रवाई के बाद, ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि हमले जारी रहे, तो वह एक बड़े आक्रामक अभियान की शुरुआत करेगा, जिससे क्षेत्र की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।


हमलों का नागरिक बुनियादी ढांचे पर प्रभाव

सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिकी लड़ाकू विमानों, ड्रोन और युद्धपोतों ने दक्षिणी ईरान में Strait of Hormuz और बंदर अब्बास के आस-पास के क्षेत्रों को निशाना बनाया। इन हमलों में ईरान के सैन्य रसद, निगरानी स्थलों और भूमिगत हथियार डिपो को नष्ट करने का दावा किया गया है। वहीं, ईरानी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी बमबारी में कम से कम पांच महत्वपूर्ण पुल, एक रेलवे स्टेशन और एक हवाई अड्डे को भारी नुकसान पहुँचा है।


ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया

ईरान के सर्वोच्च नेता के सैन्य सलाहकार, मेजर जनरल मोहसेन रजाई ने सरकारी समाचार एजेंसी के माध्यम से चेतावनी दी है कि ईरान अब केवल समान स्तर की प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका ने बमबारी जारी रखी, तो तेहरान एक पूर्ण सैन्य अभियान शुरू करेगा। अब युद्ध के दौरान बातचीत की संभावना समाप्त हो चुकी है।


अमेरिकी ठिकानों पर ईरान का पलटवार

इस बीच, ईरान ने कतर, कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य संपत्तियों को निशाना बनाया है। इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर नियंत्रण की धमकी का जवाब देते हुए, ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने कहा कि यदि अमेरिका ने ऐसा किया, तो कोई भी अमेरिकी सैनिक जीवित वापस नहीं लौटेगा।


तनाव का कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, यह तनाव होर्मुज जलडमरूमध्य में एक वाणिज्यिक मालवाहक जहाज पर हमले और दोनों देशों के बीच शांति वार्ता के असफल होने के बाद शुरू हुआ। अमेरिका ने इसे संघर्षविराम समझौते का उल्लंघन मानते हुए ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने के लिए लगातार हवाई हमले शुरू कर दिए, जिससे मध्य पूर्व में युद्ध का संकट गहरा गया है।