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अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता: वेंस का बड़ा बयान

अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण शांति समझौता संपन्न हुआ है, जिसमें उपराष्ट्रपति वेंस ने 300 अरब डॉलर के पैकेज को भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि समझौते में केवल वादों पर नहीं, बल्कि कार्रवाई पर जोर दिया गया है। नई ईरानी सरकार के कार्यों पर नजर रखने की बात भी की गई है। जानें इस समझौते के पीछे की पूरी कहानी और वेंस के बयान के प्रमुख बिंदु।
 

ईरान को 300 अरब डॉलर देने की खबरें गलत


वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच एक शांति समझौता संपन्न हो चुका है। भारतीय समयानुसार, गुरुवार सुबह पांच बजे इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। अमेरिकी राष्ट्रपति ने पेरिस में और ईरानी राष्ट्रपति ने ईरान में इस पर दस्तखत किए, जिसके बाद यह समझौता प्रभावी हो गया।


इस समझौते से वैश्विक स्तर पर राहत की लहर दौड़ गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने एक महत्वपूर्ण बयान में कहा है कि 300 अरब डॉलर के पैकेज की खबरें भ्रामक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ईरान शर्तों का पालन करता है, तो अन्य देश निवेश कर सकते हैं, लेकिन अमेरिका इस मामले में कोई वित्तीय सहायता नहीं देगा।


समझौते में कार्रवाई पर जोर

उपराष्ट्रपति वेंस ने कहा कि ईरान के साथ हुए समझौते की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसमें केवल वादों पर नहीं, बल्कि वास्तविक कार्रवाई पर जोर दिया गया है। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि नई ईरानी सरकार का मूल्यांकन उसके बयानों के बजाय उसके कार्यों के आधार पर किया जाएगा।


वेंस ने यह भी बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी पूरी सरकार उन घटनाओं से चिंतित थीं, जिनमें कुछ महीने पहले बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों की हत्या हुई थी।


नई ईरानी सरकार पर नजर

उन्होंने कहा कि जो लोग पहले सत्ता में थे, वे अब चले गए हैं। अब यह देखना होगा कि नए नेता अपने नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। वेंस ने उम्मीद जताई कि नई ईरानी नेतृत्व व्यवस्था अपने लोगों के साथ बेहतर तरीके से पेश आएगी।