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अमेरिका और ईरान के बीच संभावित सीजफायर डील की चर्चा

अमेरिका और ईरान के बीच दशकों से चल रहे तनाव के बीच, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने संभावित सीजफायर डील की चर्चा की है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष बातचीत के अगले चरण से पहले एक समझौता करना चाहते हैं। इस बीच, इज़रायल और लेबनान के बीच भी उच्चस्तरीय वार्ता हुई है, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जानें इस कूटनीतिक संवाद के पीछे की कहानी और इसके संभावित परिणाम।
 

कूटनीतिक संवाद की नई शुरुआत

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रही तनावपूर्ण स्थिति अब कूटनीतिक बातचीत में बदलती नजर आ रही है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने संकेत दिया है कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच जल्द ही एक सीजफायर समझौता हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि 49 वर्षों का अविश्वास एक रात में समाप्त नहीं हो सकता। उन्होंने बताया कि दोनों पक्ष बातचीत के अगले चरण से पहले एक समझौता करना चाहते हैं।


पहली बार हुई उच्चस्तरीय बैठक

वेंस ने कहा कि इस्लामाबाद में हुई बैठक, भले ही किसी ठोस नतीजे पर न पहुँची हो, लेकिन यह पिछले 49 वर्षों में वॉशिंगटन और तेहरान के बीच पहली बार हुई उच्चस्तरीय बैठक थी। इसमें शामिल पक्ष एक समझौता करने के इच्छुक थे। वेंस की टिप्पणियाँ उस समय आई हैं जब इज़रायल ने लेबनान के साथ शांति वार्ता की है, जो कि US-ईरान सीज़फ़ायर डील का एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है।


डोनाल्ड ट्रंप का दृष्टिकोण

वेंस ने आगे बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन किसी सीमित समझौते की तलाश में नहीं है, बल्कि वे एक व्यापक डील की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती, और हम इस लक्ष्य को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"


इज़रायल और लेबनान के बीच बातचीत

स्टेट डिपार्टमेंट ने कहा कि इज़रायल और लेबनान के बीच हुई पहली उच्च-स्तरीय बैठक "सार्थक" रही और यह बातचीत आगे भी जारी रहेगी। वॉशिंगटन में हुई बैठक के बाद, सभी पक्षों ने आपसी सहमति से तय समय और स्थान पर सीधी बातचीत शुरू करने पर सहमति जताई है। इज़रायल, लेबनान के ईरान-समर्थित हिज़्बुल्लाह आंदोलन के साथ संघर्ष में उलझा हुआ है और उसने इस समूह को हथियार-मुक्त करने की मांग की है।