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अमेरिका का इंटरनेशनल सोलर एलायंस से बाहर निकलना: जलवायु राजनीति में नया मोड़

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इंटरनेशनल सोलर एलायंस से बाहर निकलने का निर्णय लिया है, जो वैश्विक जलवायु राजनीति में नई बहस को जन्म दे रहा है। भारत ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के हटने से संगठन की मजबूती पर कोई असर नहीं पड़ेगा। विशेषज्ञ इसे अमेरिका के लिए एक रणनीतिक नुकसान मानते हैं, जबकि चीन को इससे लाभ होने की संभावना है। जानें इस फैसले के पीछे के कारण और भारत-अमेरिका संबंधों पर इसके प्रभाव के बारे में।
 

नई दिल्ली में जलवायु राजनीति का नया अध्याय

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA) से बाहर निकलने का निर्णय वैश्विक जलवायु राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे रहा है। भारत और फ्रांस के सहयोग से स्थापित इस संगठन को अमेरिका का समर्थन महत्वपूर्ण माना जाता था। हालांकि, भारत ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के हटने से गठबंधन की मजबूती पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इसके विपरीत, विशेषज्ञ इसे अमेरिका के लिए एक रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से हानिकारक कदम मानते हैं.


इंटरनेशनल सोलर एलायंस का परिचय

इंटरनेशनल सोलर एलायंस क्या है?

इंटरनेशनल सोलर एलायंस की स्थापना 2015 में पेरिस जलवायु सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने की थी। इसका मुख्यालय गुरुग्राम में स्थित है। इस संगठन का उद्देश्य विकासशील देशों को सस्ती सौर तकनीक, वित्तीय सहायता और सहयोग प्रदान करना है, ताकि वे स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकें और प्रदूषण को कम कर सकें.


डोनाल्ड ट्रंप का निर्णय

डोनाल्ड ट्रंप ने क्यों लिया यह फैसला?

डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से अमेरिका को ISA से अलग कर लिया। यह निर्णय उनकी उस नीति के अनुरूप है, जिसमें अमेरिका ऐसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों से दूरी बना रहा है, जिन्हें वह अपनी संप्रभुता और आर्थिक हितों के खिलाफ मानता है। व्हाइट हाउस के अनुसार, कई जलवायु और ऊर्जा संस्थाएं अमेरिका पर अनावश्यक जिम्मेदारियां डालती हैं, जिनसे ट्रंप प्रशासन असहमत है.


भारत-अमेरिका संबंधों पर प्रभाव

भारत-अमेरिका रिश्तों पर संभावित प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि ISA से बाहर होना केवल पर्यावरण से संबंधित निर्णय नहीं है। यह पिछले तीन दशकों में विकसित हुए भारत-अमेरिका संबंधों में एक नकारात्मक संकेत है। हालांकि, भारत ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के जाने से संगठन की गतिविधियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। भारत, फ्रांस और अन्य सदस्य देश ISA के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.


चीन को संभावित लाभ

चीन को क्यों मिल सकता है फायदा?

अमेरिका के पूर्व जलवायु दूत जॉन केरी ने इस निर्णय को चीन के लिए एक बड़ा अवसर बताया है। उनका कहना है कि अमेरिका के हटने से स्वच्छ ऊर्जा और सौर तकनीक में वैश्विक नेतृत्व की जगह चीन ले सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय नियमों को निर्धारित करने में अमेरिका की भूमिका कमजोर होगी और चीन का प्रभाव तेजी से बढ़ेगा.


अमेरिका को होने वाले नुकसान

अमेरिका को क्या नुकसान होगा?

विशेषज्ञों के अनुसार, ISA से बाहर होकर अमेरिका स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में संभावित निवेश और रोजगार के बड़े अवसर खो देगा। सौर ऊर्जा में ट्रिलियन डॉलर के निवेश से अमेरिकी कंपनियां बाहर हो सकती हैं। इसके साथ ही, जलवायु नेतृत्व की छवि को भी झटका लगेगा। भारत के लिए यह एक कूटनीतिक चुनौती है, लेकिन ISA को आगे बढ़ाने की उसकी प्रतिबद्धता बरकरार है.