अमेरिका का ईरान में सफल रेस्क्यू ऑपरेशन: भारत की भूमिका पर चर्चा
अमेरिका का ऐतिहासिक रेस्क्यू ऑपरेशन
अमेरिका ने ईरान में एक ऐसा ऑपरेशन किया है जो मिलिट्री सर्च एंड रेस्क्यू के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना बन गया है। इस ऑपरेशन में अमेरिका ने अपने दो ऑफिसर्स को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता पाई, जो एक फाइटर जेट क्रैश के बाद ईरान में फंसे थे। यह घटना भारत के उस ऑपरेशन की याद दिलाती है, जब भारत ने अपने पायलट अभिनंदन वर्धमान को पाकिस्तान से सुरक्षित निकाला था। हालांकि, दोनों ऑपरेशनों में एक बड़ा अंतर है।
पाकिस्तान ने अभिनंदन को पकड़ लिया था और उसे टॉर्चर करने की योजना बनाई थी, जबकि अमेरिकी सैनिक ईरान के कब्जे में नहीं आए थे। वर्तमान में, ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम कमजोर हो चुका है, जिससे अमेरिका के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन करना आसान हो गया।
भारत की कूटनीतिक भूमिका
मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ता जा रहा है, और इस बीच भारत की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। अमेरिका द्वारा ईरान को दी गई धमकी के बाद, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास सारागाची ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से संपर्क किया। यह बातचीत युद्ध के बाद से दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच छठी बार हुई है।
जयशंकर ने इस बातचीत की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की। ईरानी दूतावास ने भी इस वार्ता की पुष्टि की, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की गई।
अमेरिका की चेतावनी और भारत की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है, जिसमें कहा गया है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स और पुलों को निशाना बनाएगा। ट्रंप ने ईरान को गंभीर सैन्य कार्रवाई की भी धमकी दी।
इस तनाव के बीच, भारत ने ईरान के अलावा कतर और यूएई के साथ भी बातचीत की है। विदेश मंत्री जयशंकर ने इन देशों के नेताओं से मौजूदा हालात पर चर्चा की। भारत का यह प्रयास संकट को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।