×

अमेरिका की चेतावनी: ईरान ने समझौता नहीं किया तो युद्ध फिर से हो सकता है

अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि वह शांति समझौते को स्वीकार नहीं करता है, तो युद्ध फिर से भड़क सकता है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिकी बल पूरी तरह से तैयार हैं और किसी भी समय कार्रवाई शुरू कर सकते हैं। अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी, जब तक कि उसके रणनीतिक लक्ष्य हासिल नहीं हो जाते। दोनों देशों के बीच बातचीत में प्रगति हो रही है, लेकिन कुछ मतभेद अभी भी बने हुए हैं। जानें इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर और क्या हो रहा है।
 

अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी जारी


अमेरिका ने ईरान को दी चेतावनी
अमेरिका ने ईरान को स्पष्ट किया है कि यदि वह शांति समझौते को स्वीकार नहीं करता है, तो युद्ध फिर से भड़क सकता है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि ईरान के पास समझौता करने का एक और अवसर है, लेकिन यदि वह इसे ठुकराता है, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई को फिर से शुरू कर सकता है।


अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार

हेगसेथ ने बताया कि अमेरिकी बल पूरी तरह से तैयार हैं और किसी भी समय युद्ध संचालन शुरू कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के आदेश का इंतजार कर रही है, और जैसे ही निर्देश मिलेंगे, कार्रवाई शुरू की जाएगी।


अमेरिका की रणनीति जारी

हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी को जारी रखेगा। यह कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक अमेरिका अपने रणनीतिक लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर लेता। अमेरिकी जनरल डैन केन ने बताया कि अब तक 13 जहाज नाकाबंदी के कारण लौट चुके हैं, जिनमें से अधिकांश जहाज नाकाबंदी सीमा के भीतर पहुंचकर लौटे हैं।


शांति समझौते की संभावना

अमेरिका और ईरान 21 अप्रैल को समाप्त होने वाले सीजफायर से पहले समझौते के करीब पहुंच रहे हैं। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच बातचीत में प्रगति हुई है, हालांकि कुछ मतभेद अभी भी बने हुए हैं। इस बीच, तेहरान में ईरानी अधिकारियों और पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर के बीच महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है।


सीजफायर का विस्तार संभव

पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर बातचीत और प्रस्ताव साझा कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, डील के लिए सीजफायर को बढ़ाया जा सकता है, लेकिन अमेरिका ने अभी तक औपचारिक सहमति नहीं दी है।